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ये आंदोलन नहीं, जन उभार है | जंतर मंतर, नीट और गैरत का सवाल #kadwicoffee

Kadwi Coffee I कड़वी कॉफी

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ये आंदोलन नहीं, जन उभार है | जंतर मंतर, नीट और गैरत का सवाल #kadwicoffee

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Kadwi Coffee I कड़वी कॉफी
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नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जंतर मंतर पर उमड़े नौजवानों के जन उभार को कैसे समझें? कड़वी कॉफ़ी के इस अंक में पंकज कुमार के साथ शिक्षक-लेखक अपूर्वानंद और पत्रकार-संपादक निधीश त्यागी बात करते हैं हास्य की लोकतांत्रिक ताक़त, "डेस्पिरेट क्लास" की बेचैनी, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के रिश्ते, और मीडिया के बदलते चेहरे पर. अपूर्वानंद का तर्क है कि यह "आंदोलन" नहीं, एक जन उभार है — और 1974 के जेपी आंदोलन या अन्ना आंदोलन से इसका चरित्र बिलकुल अलग है. निधीश त्यागी इसे 12 साल की उस यात्रा से जोड़ते हैं जो प्रेम से शुरू होकर संदेह, भय और अब आक्रोश तक पहुँची है. पूरी बातचीत अंत तक देखिए. कड़वी कॉफ़ी को सब्सक्राइब करें करंट अफ़ेयर्स के लिए रोज़ देखें हरकारा    / @harkararozana   harkaraonline.com