व्यवहारवादी उपागम एवं संरचनात्मक प्रकार्यात्मक उपागम - लोक प्रशासन (Administration) |By Rakesh Sival
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व्यवहारवादी उपागम एवं संरचनात्मक प्रकार्यात्मक उपागम - लोक प्रशासन (Administration) |By Rakesh Sival
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लोक प्रशासन (Public Administration) | व्यवहारवादी उपागम एवं संरचनात्मक प्रकार्यात्मक उपागम - संपूर्ण विवरण | By :- राकेश सिवाल (Rakesh Siwal)
नमस्कार दोस्तों,
इस विशेष क्लास में राकेश सिवाल सर द्वारा लोक प्रशासन (Public Administration), प्रशासनिक सिद्धांत एवं तुलनात्मक लोक प्रशासन के दो अत्यंत आधारभूत, दार्शनिक और परीक्षा-उपयोगी उपागमों—"व्यवहारवादी उपागम (Behavioral Approach)" एवं "संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम (Structural-Functional Approach)"—का विस्तृत, प्रामाणिक और तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
📌 इस वीडियो में कवर किए गए प्रमुख बिंदु:
[भाग 1: व्यवहारवादी उपागम (Behavioral Approach)]
1. व्यवहारवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उद्भव:
शास्त्रीय/क्लासिकल उपागम (टेलर, फेयोल, वेबर) की औपचारिक और यांत्रिक सीमाओं की प्रतिक्रिया
एल्टन मेयो के हॉथॉर्न प्रयोग (Hawthorne Experiments) और मानव संबंध आंदोलन (Human Relations Movement) की भूमिका
शिकागो स्कूल और सामाजिक विज्ञानों में अनुभवजन्य (Empirical) क्रांति
2. हर्बर्ट साइमन (Herbert A. Simon) और व्यवहारवादी क्रांति:
साइमन की प्रसिद्ध कृति: 'Administrative Behavior' (1947)
क्लासिकल प्रशासनिक सिद्धांतों को "कहावतें और मिथक" (Proverbs and Myths) सिद्ध करना
तथ्य-मूल्य द्विभाजन (Fact-Value Dichotomy): प्रशासन को विशुद्ध विज्ञान बनाने पर बल
'सीमित तार्किकता का सिद्धांत' (Bounded Rationality) और 'संतोषप्रद निर्णय' (Satisficing Decisions)
आर्थिक मानव (Economic Man) बनाम प्रशासनिक मानव (Administrative Man)
3. व्यवहारवादी उपागम के प्रमुख लक्षण एवं योगदान:
अंतःविषयक दृष्टिकोण (Interdisciplinary): मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र का समन्वय
औपचारिक के साथ-साथ अनौपचारिक संरचनाओं और व्यक्तिगत व्यवहार का अध्ययन
अनुभवजन्य शोध, वैज्ञानिक पद्धति और मात्रात्मक तकनीकों का प्रयोग
संगठन में अभिप्रेरणा (Motivation), नेतृत्व (Leadership) और संचार का विश्लेषण (मास्लो, हर्जबर्ग, मैकग्रेगर)
4. व्यवहारवाद की सीमाएं एवं आलोचना:
मूल्यों की उपेक्षा और अत्यधिक तकनीक-केंद्रित होने का आरोप
नव लोक प्रशासन (NPA) द्वारा प्रासंगिकता और सामाजिक समता के अभाव पर प्रहार
विकासशील देशों की सामाजिक वास्तविकताओं में सीमित अनुप्रयोग
[भाग 2: संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम (Structural-Functional Approach)]
5. संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम की अवधारणा एवं मूल आधार:
उपागम का स्रोत: समाजशास्त्र (टैल्कॉट पार्सन्स / Talcott Parsons) और नृविज्ञान (रेडक्लिफ ब्राउन, मैलिनोव्स्की)
'संरचना' (Structure - संगठन, पद, नियम) और 'प्रकार्य' (Function - किए जाने वाले कार्य व भूमिकाएं) का अर्थ
किसी व्यवस्था में संरचनाएं कैसे प्रकार्यों को पूरा करती हैं और व्यवस्था को संतुलित रखती हैं
6. फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स (Fred W. Riggs) का प्रशासनिक मॉडल:
तुलनात्मक लोक प्रशासन (CPA - Comparative Public Administration) में रिग्स का ऐतिहासिक योगदान
विकासशील देशों (विकासशील समाजों) के प्रशासन के अध्ययन हेतु पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण (Ecological Approach)
समाज के तीन ऐतिहासिक मॉडल:
समेकित समाज (Fused Society) - कृषि प्रधान, पारंपरिक समाज
विवर्तित समाज (Diffracted Society) - आधुनिक, औद्योगिक, अत्यधिक विशिष्ट समाज
संपार्श्विक समाज (Prismatic Society) - संक्रमणकालीन समाज (भारत जैसे विकासशील देश)
7. रिग्स का प्रिज्मैटिक मॉडल एवं साला मॉडल (Prismatic-Sala Model):
प्रिज्मैटिक समाज के तीन मुख्य लक्षण:
विजातीयता (Heterogeneity) - परंपरा और आधुनिकता का एक साथ सह-अस्तित्व
औपचारिकता (Formalism) - नियमों और वास्तविक व्यवहार में भारी अंतर
अतिव्यापन (Overlapping) - आधुनिक औपचारिक संरचनाओं पर पारंपरिक पारिवारिक व सामाजिक दबाव
'साला मॉडल' (Sala Model): प्रिज्मैटिक समाज की प्रशासनिक व्यवस्था (नेपोटिज्म, भाई-भतीजावाद, रिश्वतखोरी, प्रशासनिक अक्षमता)
'बाजार कैंटीन मॉडल' (Bazaar-Canteen Model): आर्थिक परिप्रेक्ष्य
8. उपागमों की आधुनिक प्रासंगिकता एवं तुलना:
व्यवहारवाद (संगठनात्मक व्यवहार और निर्णयन) बनाम संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम (पारिस्थितिकी और सामाजिक संदर्भ)
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में रिग्स के प्रिज्मैटिक मॉडल (औपचारिकता और अतिव्यापन) के जीवंत उदाहरण
सुशासन, ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों में दोनों उपागमों की उपयोगिता
9. परीक्षा उपयोगी अभ्यास:
RAS Mains Paper 3 (Public Administration & Management - Unit 3: Concepts, Approaches & Theories)
🎯
⏰ Timestamps (अध्यायवार विभाजन):
00:00 - परिचय एवं दोनों उपागमों की रूपरेखा
02:15 - व्यवहारवादी उपागम: पृष्ठभूमि, हॉथॉर्न प्रयोग एवं उद्भव
18:30 - हर्बर्ट साइमन का प्रशासनिक व्यवहार, तथ्य-मूल्य एवं सीमित तार्किकता
40:00 - व्यवहारवाद के मूल लक्षण, अंतःविषयक उपागम व सीमाएं
01:05:00 - संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम: अर्थ, टैल्कॉट पार्सन्स व समाजशास्त्रीय आधार
01:28:00 - फ्रेड रिग्स का योगदान: Fused, Diffracted एवं Prismatic समाज
01:50:00 - प्रिज्मैटिक समाज के लक्षण: विजातीयता, औपचारिकता एवं अतिव्यापन
02:12:00 - रिग्स का साला मॉडल (Sala Model) व भारतीय प्रशासन में प्रासंगिकता
02:28:00 - RAS Mains व UPSC हेतु मॉडल उत्तर-लेखन अभ्यास एवं विगत वर्षों के प्रश्नोत्तर
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