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अध्याय5 श्रीमद् भगवद्गीता-कर्म सन्यास योग- इस अध्याय मे श्री कृष्ण ने अर्जुन के सभी संदेह दूर किए!

भक्ति कुंज //Sunita Bajaj

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अध्याय5 श्रीमद् भगवद्गीता-कर्म सन्यास योग- इस अध्याय मे श्री कृष्ण ने अर्जुन के सभी संदेह दूर किए!

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भक्ति कुंज //Sunita Bajaj
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अध्याय5 श्रीमद् भगवद्गीता-कर्म सन्यास योग- इस अध्याय मे श्री कृष्ण ने अर्जुन के सभी संदेह दूर किए! जय श्री कृष्णा! 🙏 आज के इस वीडियो में हम श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 5 - 'कर्मसंन्यासयोग' पर चर्चा करेंगे। इस अध्याय में अर्जुन के प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान श्री कृष्ण ने 'कर्म संन्यास' (संसार को छोड़ना) और 'कर्मयोग' (निष्काम भाव से कर्म करना) के बीच का गहरा भेद समझाया है। श्री कृष्ण बताते हैं कि कर्मों का त्याग करने से बेहतर है कि हम फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करें और मन को प्रभु भक्ति में लगाएं। यदि आप जीवन में मानसिक शांति, समभाव और सही अर्थ में संन्यास को समझना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें। अस्वीकरण: इस वीडियो का मुख्य उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के पावन और दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है। हमारा प्रयास वेदों, पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के संदेश को सरल हिंदी में प्रस्तुत करना है। इस वीडियो में दी गई जानकारी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित है। यदि किसी विशेष श्लोक या अर्थ को समझने में कोई त्रुटि हुई हो, तो हम क्षमाप्रार्थी हैं। जय श्री कृष्णा! 🙏