Перейти к содержимому

गोवर्धन पूजा स्पेशल श्री गिरिराज चालीसा Govardhan Puja Special Giriraj Chalisa | Govardhan Puja 2025

Supertone Digital

0:00 / 0:00

गोवर्धन पूजा स्पेशल श्री गिरिराज चालीसा Govardhan Puja Special Giriraj Chalisa | Govardhan Puja 2025

3 448 просмотров · 1 г. назад
Supertone Digital
12,2 млн подписчиков
3 448 просмотров · 1 г. назад
► Recording Studio: Smart Digital ( 9711868600 / 8700635937 ) ► Visit Our Website: https://bit.ly/3GCD2eo ► Video, Concept & Direction: Ishan Narrang ► Production Head: Ishan Narrang ► Producer: Rajender Narang ( Vicky Narang ) ► Copyright: Supertone Digital ************************************************************* ► Enjoy & Stay Connected with us! ► Subscribe to SUPERTONE DIGITAL: https://goo.gl/UADBDH ► Like us on: facebook.com/supertonedigital ************************************************************** ► सुपरटोन डिजिटल चैनल पर अपना भजन व् सांग रिलीज़ करवाने के लिए सम्पर्क करें : 08700635937 ► Mail us at : supertonedigital01@gmail.com ************************************************************ || दोहा || बन्दहुँ वीणा वादिनी धरि गणपति को ध्यान | महाशक्ति राधा सहित, कृष्ण करौ कल्याण || सुमिरन करि सब देवगण, गुरु पितु बारम्बार | बरनौ श्रीगिरिराज यश, निज मति के अनुसार || || चौपाई || जय हो जय बंदित गिरिराजा | ब्रज मण्डल के श्री महाराजा || विष्णु रूप तुम हो अवतारी | सुन्दरता पै जग बलिहारी || स्वर्ण शिखर अति शोभा पावें | सुर मुनि गण दरशन कूं आवें || शांत कंदरा स्वर्ग समाना | जहाँ तपस्वी धरते ध्याना || द्रोणगिरि के तुम युवराजा | भक्तन के साधौ हौ काजा || मुनि पुलस्त्य जी के मन भाये | जोर विनय कर तुम कूं लाये || मुनिवर संघ जब ब्रज में आये | लखि ब्रजभूमि यहाँ ठहराये || विष्णु धाम गौलोक सुहावन | यमुना गोवर्धन वृन्दावन || देख देव मन में ललचाये | बास करन बहुत रूप बनाये || कोउ बानर कोउ मृग के रूपा | कोउ वृक्ष कोउ लता स्वरूपा || आनन्द लें गोलोक धाम के | परम उपासक रूप नाम के || द्वापर अंत भये अवतारी | कृष्णचन्द्र आनन्द मुरारी || महिमा तुम्हरी कृष्ण बखानी | पूजा करिबे की मन में ठानी || ब्रजवासी सब के लिये बुलाई | गोवर्धन पूजा करवाई || पूजन कूं व्यंजन बनवाये | ब्रजवासी घर घर ते लाये || ग्वाल बाल मिलि पूजा कीनी | सहस भुजा तुमने कर लीनी || स्वयं प्रकट हो कृष्ण पूजा में | मांग मांग के भोजन पावें || लखि नर नारि मन हरषावें | जै जै जै गिरिवर गुण गावें || देवराज मन में रिसियाए | नष्ट करन ब्रज मेघ बुलाए || छाया कर ब्रज लियौ बचाई | एकउ बूंद न नीचे आई || सात दिवस भई बरसा भारी | थके मेघ भारी जल धारी || कृष्णचन्द्र ने नख पै धारे | नमो नमो ब्रज के रखवारे || करि अभिमान थके सुरसाई | क्षमा मांग पुनि अस्तुति गाई || त्राहि माम मैं शरण तिहारी | क्षमा करो प्रभु चूक हमारी || बार बार बिनती अति कीनी | सात कोस परिकम्मा दीनी || संग सुरभि ऐरावत लाये | हाथ जोड़ कर भेंट गहाए || अभय दान पा इन्द्र सिहाये | करि प्रणाम निज लोक सिधाये || जो यह कथा सुनैं चित लावें | अन्त समय सुरपति पद पावैं || गोवर्धन है नाम तिहारौ | करते भक्तन कौ निस्तारौ || जो नर तुम्हरे दर्शन पावें | तिनके दुख दूर ह्वै जावे || कुण्डन में जो करें आचमन | धन्य धन्य वह मानव जीवन || मानसी गंगा में जो नहावे | सीधे स्वर्ग लोक कूं जावें || दूध चढ़ा जो भोग लगावें | आधि व्याधि तेहि पास न आवें || जल फल तुलसी पत्र चढ़ावें | मन वांछित फल निश्चय पावें || जो नर देत दूध की धारा | भरौ रहे ताकौ भण्डारा || करें जागरण जो नर कोई | दुख दरिद्र भय ताहि न होई || श्याम शिलामय निज जन त्राता | भक्ति मुक्ति सरबस के दाता || पुत्रहीन जो तुम कूं ध्यावें | ताकूं पुत्र प्राप्ति ह्वै जावें || दण्डौती परिकम्मा करहीं | ते सहजहिं भवसागर तरहीं || कलि में तुम सक देव न दूजा | सुर नर मुनि सब करते पूजा || || दोहा || जो यह चालीसा पढ़ै, सुनै शुद्ध चित्त लाय । सत्य सत्य यह सत्य है, गिरिवर करै सहाय || क्षमा करहुँ अपराध मम, त्राहि माम् गिरिराज | श्याम बिहारी शरण में, गोवर्धन महाराज ||