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मेरा अपना कौन है? मैं वास्तव में कौन हूँ? | गीता का गहरा ज्ञान | अध्याय 2भाग-2

गीता री चोखी बातां

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मेरा अपना कौन है? मैं वास्तव में कौन हूँ? | गीता का गहरा ज्ञान | अध्याय 2भाग-2

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गीता री चोखी बातां
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भगवद गीता के द्वितीय अध्याय सांख्य योग के इस भाग में हम श्लोक 9 से 14 तक भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए उस ज्ञान को सरल मारवाड़ी भाषा में समझेंगे, जो अर्जुन के शोक और मोह की जड़ पर प्रकाश डालता है। अर्जुन जब यह अ नुभव करता है कि संसार का बड़ा से बड़ा राज्य भी उसके भीतर के शोक को दूर नहीं कर सकता, तब वह अपनी असमर्थता स्वीकार करके श्रीकृष्ण की शरण में जाता है। इसके बाद भगवान उसे समझाते हैं कि— वास्तव में कौन हूँ? क्या मैं केवल यह शरीर हूँ? जिन्हें मैं अपना मानकर दुःखी हो रहा हूँ, उनसे मेरा वास्तविक संबंध क्या है? और सुख-दुःख आखिर कितने स्थायी हैं? इन्हीं प्रश्नों के माध्यम से भगवान आत्मा और शरीर के भेद तथा सुख-दुःख की अनित्यता का ज्ञान देना प्रारंभ करते हैं इस भाग को ध्यान से सुनिए, क्योंकि जब ‘मैं कौन हूँ’ का सही ज्ञान होने लगता है, तब जीवन को देखने की हमारी पूरी दृष्टि बदलने लगती है। सरल भाषा में सुनिए, समझिए और गीता के ज्ञान को जीवन में अपनाने का प्रयास कीजिए। Hashtags #भगवद्गीता #सांख्ययोग #गीता_ज्ञान #मैं_कौन_हूँ #श्रीकृष्ण #आत्मज्ञान #GeetaInMarwadi #BhagavadGita #RamaDharendra