गरीबी और हिंसा वाले देशों में क्यों पॉपुलर रूस? [Putin's Power Play in Africa] DW Documentary हिन्दी
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माली, बुर्किना फ़ासो और नाइजर, तीनों देश तख़्तापलट के बाद सैन्य शासन के अधीन हो गए. एक ओर पश्चिमी सैनिकों को देश से निकलने को कहा गया, तो दूसरी ओर रूस ने हथियारों, सलाहकारों और प्रॉपेगैंडा की मदद से इस ख़ालीपन को भरने की कोशिश की.
जनसंख्या की नज़र से देखें, तो साहेल दुनिया का सबसे युवा इलाक़ा है. लेकिन यह दुनिया का सबसे ग़रीब इलाक़ा भी है. यहां के लोग अवसरों के अभाव, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और आतंकवाद का सामना कर रहे हैं. हालिया आंकड़ों के मुताबिक़ आतंकवाद से जुड़ी आधे से ज़्यादा मौतें साहेल इलाक़े में ही हुई हैं.
इस बीच रूस सैन्य शासकों की मदद कर रहा है और अपने रणनीतिक हित भी साध रहा है. जिस इलाक़े में कभी लोकतंत्र और विकास के लिए मदद का वादा किया गया था, वहां क्रेमलिन लगातार अपना प्रभाव फैला रहा है. आख़िरकार खेल ताक़त और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार का है.
यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को उन देशों में ले जाती है, जहां पत्रकारिता करना नामुमकिन हो चुका है. जिन लोगों ने अपनी कहानी साझा की है, उन्होंने अपनी ज़ुबान खोलकर बहुत बड़ा जोखिम उठाया है. यह फ़िल्म बनाने वाली टीम भी गंभीर हालात में फंस गई थी, जो कि साहेल की वास्तविकता बन चुकी है. एक ऐसी दुनिया, जो दहशत, दमन और भू-राजनीतिक संघर्ष में डूबी है.
यह फ़िल्म दिखाती है कि किस तरह रूस बेहद सख़्ती से अफ़्रीका पर अपनी पकड़ बनाता चला जा रहा है. लेकिन यह इन बदलावों की वजहों की पड़ताल भी करती है. कम से कम शुरुआत में साहेल इलाक़े में बहुत सारे लोगों ने रूस की नई भूमिका का स्वागत किया था.
'अफ़्रीका: पुतिन की बढ़ती ताक़त का खेल' एक खोजी डॉक्यूमेंट्री है, जो दुनिया के उस इलाक़े के केंद्र में जाती है, जो वैश्विक शक्तियों के संघर्ष में एक कठपुतली बन गया है.
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