परविद्या भक्षणी मन्त्र | विधि-विधान और मंत्र जाप के साथ | Parvidya Bhakshani Mantra | Mantra 11 time
Mantra - Tantra - Yantra ( मंत्र - तंत्र - यंत्र )
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परविद्या भक्षणी मन्त्र | विधि-विधान और मंत्र जाप के साथ | Parvidya Bhakshani Mantra | Mantra 11 time
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मंत्र तंत्र यंत्र चैनल में आप सभी का स्वागत है आज में आप सभी के लिए परविद्या भक्षणी मंत्र लेकर आया हूं
शास्त्रो में लिखा है यदि आप को आर्थिक मानसिक, शारीरिक हानि पहुचाने के उद्धेश से किसी स्वार्थी व्यक्ति द्वारा कोई अभिचाारिक कर्म आप के विरूद्ध कराया हो तो भगवती बगला मुखी का यह मंत्र अति उत्तम है। इस मंत्र की यह विशेषता है कि विरोधी द्वारा प्रयोग की गई विद्या का हरण कर शमन कर देती है।
यह मंत्र 1 लाख जप से सिद्व होता है। जिसे 14 से 21 दिनों में पूर्ण कर लेना है। मंत्र सिद्ध होने के पश्चात 5 किलो मीटर तक कोई भी विद्या कार्य नही करेगी।
एक लाख जप के उपरान्त दशांश जप कर हवन करना है
हवन सामग्री सरकार होगी : हल्दी, पीली सरसों, साबुत लाल मिर्च को सरसों के तेल में मिला लें हो गई आपकी हवन सामग्री तैयार
इस मंत्र को सारी विधि के अनुसार जाप करके दे रहा हूं कृपया उसे सुने और लाभ लें चैनल को सब्सक्राइब करें धन्यवाद
संकल्प : ऊँ सिद्धी द्वारा पर कृत्या नष्टार्थे पर-मंत्र, पर-तन्त्र, पर-यंत्र भक्षार्थे च मम सर्वाभीष्ठ सिद्धियर्थे भगवती बगला मूलमंत्र सम्पुटे पर विद्या भक्षिणी मंत्र एक लक्ष जपे अहम् कुर्वे।
मंत्र - परविद्या भक्षणी मन्त्र
विनियोग : ऊँ अस्य श्री पर विद्या-भेदिनी बगला मुखी मन्त्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, पर विद्या भक्षिणी श्री बगलामुखी देवता, आं बीजं, ह्ल्रीं शक्ति, क्रो कीलंक, श्री बगला-देवी-प्रसाद सिद्धि द्वारा पर-विद्या भेदनार्थे जपे विनियोगः।
ऋष्यादि न्यास : श्री ब्रह्मर्षये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, पर विद्या भक्षिणी श्री बगलामुखी देवतायै नमः हृदि, आं बीजाय नमः गुहो, ह्ल्रीं शक्तिये नमः पदियोः, क्रों कीलकाये नमः सर्वाग्ङे, श्री बगलादेवी प्रसाद सिद्धि द्वारा पर विद्या भेदनार्थेजपे विनियोगाय नमः अज्जलौ।
कर-न्यास : आं हृीं क्रों अंगुष्ठाभ्यां नमः, वद वद तर्जनीभ्यां स्वाहा, वाग्वादिनि मध्यमाभ्यां वषट्, स्वाहा अनामिकाभ्यां हुं, ऐ क्लीं सौं कनिष्ठाभ्यां वौष्ट्, ह्ल्रीं करतल-कर-पुष्टाभ्यां फट्।
अग्ङ न्यास : आं ह्ल्रीं क्रों हृदयाय नमः, वद वद शिर से स्वाहा, वाग्वादिनि शिखायै वषट्, स्वाहा कवचाय हुं, ऐं क्लीं सौ नेत्र-त्रयाय वौष्ट्, ह्ल्रीं अस्त्राय फट्।
ध्यान -
सर्व मंत्र मयीं देवीं, सर्वाकर्षण-कारिणीम्।
सर्व विद्या भक्षिणी च भजेऽहं विधि पूर्वकम्।
मंत्र - परविद्या भक्षणी मन्त्र
ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं बगला मुखि पर प्रयोगम् ग्रस ग्रस,
ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं ब्रम्हास्त्र रूपिणि पर विद्या-ग्रासिनि! भक्षय भक्षय,
ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं पर-प्रज्ञा हारिणि! प्रज्ञां भ्रंशय भ्रंशय
ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं स्तम्भ नास्त्र रूपिणि! बुद्धिं नाशय नाशय, पच्चेन्द्रिय-ज्ञांन भक्ष भक्ष,
ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं बगला मुखि हुं फट् स्वाहा।