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जर्मनी का कूरियर बिज़नेस: शोषण का सिस्टम [Germany’s courier driver business] | DW Documentary हिन्दी

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जर्मनी का कूरियर बिज़नेस: शोषण का सिस्टम [Germany’s courier driver business] | DW Documentary हिन्दी

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कई जर्मन शहरों में साइकिल कूरियर लोगों के घरों तक बर्गर, पीत्ज़ा और दूसरे खाने पहुंचाते हैं. इनमें से हज़ारों भारतीय राइडर्स हैं. उन्हें जर्मनी में अच्छी पढ़ाई के वादे से लुभाया जाता है और इस प्रक्रिया में वे भारी क़र्ज़ में डूब जाते हैं. “हम जानवर नहीं हैं!” शिवानी शर्मा बर्लिन श्रम न्यायालय में एक मुश्किल दिन के बाद अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करती हैं. साइकिल कूरियर के रूप में काम करने वाली शिवानी, जो प्रेग्नेंसी की लास्ट स्टेज में हैं, पिछले डेढ़ साल से कई महीनों की बकाया सैलरी का इंतज़ार कर रही हैं. “जर्मनी के लोग ये काम लीफ़रांडो, वोल्ट या ऊबर-ईट्स में क्यों नहीं करते?” समीउल्लाह भी सहमति जताते हुए कहते हैं. “इस सवाल का जवाब खुद सोचिए!” ये डॉक्यूमेंट्री इसी सवाल की गहराई से पड़ताल करती है और जर्मनी के शहरों में तेज़ी से फैल रही एक शोषण प्रणाली को उजागर करती है. इसमें दिखाया गया है कि हजारों युवा भारतीय महंगी निजी यूनिवर्सिटीज़ में बेकार डिग्री हासिल करने के लिए इस देश में आते हैं. उन्हें एजेंसियों द्वारा लालच देकर यहां बुलाया जाता है, जिसके कारण वे भारी कर्ज़ में डूब जाते हैं. जर्मनी पहुंचने के बाद उनके साथ बेईमान मकान मालिक धोखा करते हैं और वे ऐसे नियोक्ताओं के पास काम करने पर मजबूर हो जाते हैं, जो उनका शोषण करते हैं. उन्हें झूठे कॉन्ट्रैक्ट्स दिए जाते हैं, अवैध रूप से काम कराया जाता है और न्यूनतम वेतन से भी बहुत कम भुगतान किया जाता है. ये फिल्म जर्मनी में भारतीय कूरियर ड्राइवरों के असुरक्षित हालात उजागर करती है. फिल्मकारों ने अपने शोध के लिए महीनों तक इस समुदाय में ख़ुद को डुबो दिया और वहां के जीवन को करीब से समझा. वकील मार्टिन बेषर्ट डिलीवरी सर्विसेज़ जैसे वोल्ट, लीफ़रांडो और ऊबर-ईट्स को “श्रम कानून प्रयोगशालाएं” कहते हैं. वह कई कूरियर ड्राइवरों का केस लड़ते हैं, जो अपने काम और ज़िंदगी के मुश्किल हालात के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने लगे हैं. हालांकि, ये काम उनके लिए काफी मुश्किल भरा है. इन परिस्थितियों की जानकारी अब भारत तक भी पहुंच गई है. नई दिल्ली में जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमान ने एक साक्षात्कार में चेतावनी दी कि ग़लत तरीक़े से की गई प्रवास नीति अक्सर “अवैध रोजगार और असुरक्षित जीवन परिस्थितियों” में समाप्त होती है, खासकर संदिग्ध शैक्षणिक संस्थानों के ज़रिए. इसका नतीजा भारतीय छात्रों को नुक़सान में होता है, जिनकी बेहतर जीवन की आशाएं अक्सर दूसरों के फायदे के लिए ही इस्तेमाल होती हैं. #dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #germany #exploitation #courier #ubereats ---------------------------------------------------------------------------------------- अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए. विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: ‪@dwhindi‬ और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G