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महत्वाकांक्षा तो छोड़ दो, लेकिन महत्वाकांक्षी जैसा श्रम करता है, वैसा ही श्रम करो : Osho

Antar Gyaan (Inspired by Osho)

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महत्वाकांक्षा तो छोड़ दो, लेकिन महत्वाकांक्षी जैसा श्रम करता है, वैसा ही श्रम करो : Osho

251 просмотр · 2 недели назад
Antar Gyaan (Inspired by Osho)
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जीवन का नियम बहुत विरोधाभासी है। हम जिस चीज़ से बचना चाहते हैं, कई बार उसी से भागते-भागते और अधिक उलझ जाते हैं। छाया से भागने पर छाया पीछे आती है, लेकिन रुक जाने पर वह भी रुक जाती है। इस गहरे ओशो प्रवचन में जीवन, वासना, मृत्यु, वर्तमान और समर्पण के बीच छिपे इसी विरोधाभास को समझाया गया है। ओशो कहते हैं कि जीवन की तृष्णा को छोड़ने का अर्थ जीवन को छोड़ना नहीं है, बल्कि जीवन को भविष्य में खोजना छोड़ना है। जीवन अभी है, यहीं है। लेकिन हमारी आंखें या तो बीते हुए कल में लगी रहती हैं या आने वाले कल की इच्छाओं, योजनाओं और चिंताओं में। इस प्रवचन में समझें: • जीवन की तृष्णा और दुख का संबंध क्या है? • छाया से भागने के बजाय उसके प्रति जागना क्या है? • नदी में जीवित व्यक्ति क्यों डूबता है और मुर्दा क्यों तैरता है? • समर्पण और संघर्ष के बीच क्या अंतर है? • वर्तमान में जीना वास्तव में क्या है? • सभी इच्छाएं भविष्य से क्यों जुड़ी होती हैं? • वासना दुख का बीज कैसे बनती है? • मृत्यु को स्वीकार करने से जीवन की अनुभूति कैसे गहरी हो सकती है? • “बचाओगे तो खो दोगे, खोने को राजी हो जाओ तो पा लोगे” — इस विरोधाभास का अर्थ क्या है? जीवन को भविष्य में मत खोजिए। जीवन अभी है। यहीं है। इसी क्षण है। अगर यह प्रवचन आपको भीतर देखने के लिए प्रेरित करे, तो वीडियो को Like करें और ऐसे ही गहरे आध्यात्मिक विचारों के लिए चैनल को Subscribe करें। #Osho #OshoHindi #OshoDiscourse #जीवन #ध्यान #आध्यात्मिकता #वासना #वर्तमान #सत्य #समर्पण