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नमाज़ में अल्लाह का ज़िक्र कैसे करें? | सूरह फ़ातिहा का हिंदी/उर्दू में मतलब और तफ़सीरटाइटल

Mira Datar

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नमाज़ में अल्लाह का ज़िक्र कैसे करें? | सूरह फ़ातिहा का हिंदी/उर्दू में मतलब और तफ़सीरटाइटल

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Mira Datar
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بسم الله الرحمن الرحيم नमाज़ में अल्लाह का ज़िक्र कैसे करें? | सूरह फ़ातिहा का मतलब और तफ़सीर इस वीडियो में हम सूरह फ़ातिहा की आयतों को समझने, उनके अर्थ पर गौर करने और नमाज़ में अल्लाह तआला की याद की तरफ़ अपना ध्यान लाने की कोशिश करेंगे। अल्लाह तआला कुरआन मजीद में फ़रमाता है: إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي अर्थ: “बेशक मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। इसलिए मेरी इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम करो।” — सूरह ताहा, आयत 14 इस वीडियो में जानिए: • सूरह फ़ातिहा का अर्थ और उसका पैग़ाम • अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन का मतलब • इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन का अर्थ • नमाज़ में ध्यान भटकने पर दोबारा ध्यान कैसे लाएँ • कुरआन को समझकर पढ़ने और उस पर अमल करने की अहमियत हमारी कोशिश है कि हम कुरआन मजीद को समझें, उसके संदेश पर गौर करें और ख़ुशू व ख़ुज़ू के साथ नमाज़ अदा करने की कोशिश करें। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सबको कुरआन समझने, उस पर अमल करने और सच्चे दिल से इबादत करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन। वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें और ऐसी इस्लामी जानकारी के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें।