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पाप का बाप कौन है भाई कहां रहता क्या खायें //sant Amrit saheb// #kabirbhajan #amritsaheb #भजन

Kartavya se Kalyan Tak

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पाप का बाप कौन है भाई कहां रहता क्या खायें //sant Amrit saheb// #kabirbhajan #amritsaheb #भजन

39 264 просмотра · 4 месяца назад
Kartavya se Kalyan Tak
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Description:- शीर्षक विचार: पाप का बाप कौन है? | पण्डित और वेश्या का संवाद | पद-53 | संत अमृत साहेब विवरण: नमो नमः / जय श्री कृष्ण 🙏 आज के इस विशेष भजन में हम संत अमृत साहेब द्वारा रचित एक बहुत ही मार्मिक और शिक्षाप्रद प्रसंग सुनेंगे। यह भजन मात्र एक गीत नहीं, बल्कि जीवन की एक गहरी सच्चाई को उजागर करता है। भजन का सार: अक्सर हम शास्त्रों और विद्याओं को पढ़कर स्वयं को ज्ञानी मान लेते हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब हमारे सामने कोई प्रलोभन (लालच) आता है। इस पद में एक विद्वान पण्डित अपनी पत्नी के पूछने पर "पाप का बाप कौन है" का उत्तर खोजने काशी की ओर निकलता है। मार्ग में उसकी मुलाकात एक वेश्या से होती है, जहाँ वह ज्ञान और लालच के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझता है। यह भजन हमें सिखाता है कि 'लोभ' (Greed) ही वह बीज है जिससे पाप का जन्म होता है। जब तक मन में लालच है, तब तक सारी विद्या अधूरी है। प्रमुख बिंदु: रचना: संत अमृत साहेब प्रसंग: पण्डित और वेश्या का संवाद (पाप का बाप कौन?) शिक्षा: लोभ और लालच का त्याग ही वास्तविक ज्ञान है। हमारे साथ जुड़ें: अगर आपको यह भजन और इसका आध्यात्मिक संदेश पसंद आया हो, तो कृपया वीडियो को Like करें, Comment में अपने विचार साझा करें और हमारे चैनल "कर्तव्य से कल्याण तक" को Subscribe करना न भूलें। ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ॥ तर्ज—ख्याल जकड़ी ॥ एक पण्डित काशी में पढ़कर, वापिस पहुँचा आय। देवी जी उनकी, ऐसे रही हैं बतराय ॥ टेक ॥ बहुत दिना काशी में रहकर, सारी विद्या पढ़ि आये। छः और चार अठारह पढ़कर, अच्छे पण्डित कहलाए। एक बात मुझको बतला दो, समझ मेरी में आ जाये। पाप का बाप किसे कहते हैं, कहाँ रहता और क्या खाये जी। दुविधा दूर करो मेरे मन की, सब चित्त चिन्ता जाय ॥ देवीजी उनकी ॥ 1 ॥ पण्डित जी कहन लगे ऐसे, यह गुरु ने मोहि बतलाया ना। देवी बोली जल्दी जाओ, बूझ के फिर वापिस आना। पण्डित जाय काशी में पहुँचा, हाथ जोड़ि यो बतलाना। पाप का बाप कहूँ किसको, देवी जी ने मुझसे ठाना जी। सो पाप का बाप नहीं मैं जानूँ, तुमने दी अटकाय ॥ देवीजी उनकी ॥ 2 ॥ थोड़ी दूर चले जाओ यहाँ से, गुरु आश्रम हमारो है। गुरु हमारे उत्तर देंगे, बनि जाय काम तुम्हारो है। लम्बे-लम्बे पैर रखे, रास्ता में पण्डित हारो है। एक दरवाजे पर बैठ गयो, जानै राम नाम उच्चारो है जी। वेश्या निकल के बाहर आई, कहन लगी समझाय ॥ देवीजी उनकी ॥ 3 ॥ कहाँ से आये कैसे बैठे, कौन काम कहाँ जावोगे। तब पण्डित जी कहन लगे, हम सारी बात बतावेंगे। जाति हमारी ब्राह्मण है, हम गुरु आश्रम पधारेंगे। पाप का बाप कहूँ किसको, हम गुरु से उत्तर लावेंगे जी। कौन जाति तुम हमें बताओ, पानी दो पिलबाय ॥ देवीजी उनकी ॥ 4 ॥ वेश्या कहन लगी पण्डित जी, हमको तुम वेश्या जानो। वेश्या नाम सुनत पण्डित को, हैगयो है होश रवानो। सूखि गयो पण्डित को चेहरा, भूलि गयो पीनो-खानो। वेश्या कहन लगी पण्डित जी, कैसे भय तुमने मानो जी। उत्तर तुम्हरो मैं दे दूँगी, दो चिन्ता बिसराय ॥ देवीजी उनकी ॥ 5 ॥ अन्दर आवो क्यों घबरावो, एक थैली मोहरनि की लेना। कोई नहीं देख रहा यहाँ तुमको, नहीं किसी से तुम कहना। सुनकर पण्डित चुप्पी मारी, कियो इसारो फिर नैना। पण्डित सरकि पलिंग पर बैठो, मान लिया उसका कहना जी। सो थैली एक दई मोहरनि की, पण्डित गयो मुसकाय ॥ देवीजी उनकी ॥ 6 ॥ -------------------------------------------------------- Hashtags: #SantAmritSaheb #Bhajan #SpiritualGyan #KalyanTak #PapiKaBaap #HindiBhajan #Motivation #SpiritualAwakening