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भगीरथ की हज़ार वर्ष की तपस्या | पितृ पक्ष कथा | धर्म कथा EP 8

Dharma Katha धर्म कथा

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भगीरथ की हज़ार वर्ष की तपस्या | पितृ पक्ष कथा | धर्म कथा EP 8

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Dharma Katha धर्म कथा
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हज़ार वर्ष पूरे हुए, तब आकाश से एक वाणी गूँजी। आग के बीच खड़े उस पुरुष को पता ही नहीं था कि कितना समय बीत गया। धूप ने त्वचा काली कर दी थी। बाँहों का दर्द कब का मर चुका था। उसने अपने बारे में सोचना छोड़ दिया था। अब वह बस एक इच्छा था, दो पैरों पर खड़ी: नदी आ जाए। धर्म कथा — सीज़न 1: पितृ पक्ष — एपिसोड 8 स्रोत: Valmiki Ramayana, Bala Kanda 42-43 ▶ पूरा सीज़न देखें:    • धर्म कथा सीज़न 1: पितृ पक्ष की कथाएँ (हिंदी)   🎧 पॉडकास्ट पर सुनें: https://rss.com/podcasts/dharma-katha-hindi/ पिछला भाग: एपिसोड 7। स्रोत। श्रेणी: शास्त्र। यह कथा वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग बयालीस और सर्ग तैंतालीस के आरंभ से है। ब्रह्माजी का वरदान, भगीरथ के दोनों वर, और पृथ्वी के गंगा का पतन न सह पाने की बात, मूल पाठ में हैं। संस्कृत पंक्तियाँ रामायण एक, बयालीस, चौबीस के पूर्वार्ध, एक, तैंतालीस, एक, और एक, तैंतालीस, तीन की हैं। शिव का प्रकट होना और गंगा को मस्तक पर धारण करने का वचन मूल पाठ में है। भगीरथ के मन के भाव और ठहराव पर मेरी टिप्पणियाँ मेरे अपने चित्रण हैं। सूचना: श्लोक प्रकाशित संस्करणों से उद्धृत हैं; उन पर निर्भर होने से पहले किसी संस्कृत विद्वान से जाँच करा लें। इस कथा का वाचन AI आवाज़ में किया गया है। #पितृपक्ष #धर्मकथा #श्राद्ध #सनातनधर्म #PitruPaksha