बुरे पड़ोसी बहुत सताते थे, लेकिन भाग्यशाली महिला के आने से पूरा परिवार बदल गया।
नाटक तूफान
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बुरे पड़ोसी बहुत सताते थे, लेकिन भाग्यशाली महिला के आने से पूरा परिवार बदल गया।
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नाटक तूफान
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वुफू पर्वत की एक शिष्या खुद को ‘सौभाग्य का तारा’ मानती है, लेकिन गुरु-भाइयों की चाल में आकर वह मान बैठती है कि बदकिस्मती उससे चिपकी है—और इससे छुटकारा पाने का एक ही उपाय है: किसी ऐसे व्यक्ति का साया, जिसकी पुण्य-यात्रा पूर्ण हो चुकी हो। शहर पहुंचकर वह ‘दस जन्मों का नेक’ माने जाने वाले लिन साहब तक जाती है, मगर ठुकरा दी जाती है। तभी एक नकली ‘महागुरु’ का भंडाफोड़ करते हुए उसकी मुलाकात दयालु जियांग दादी से होती है, जो उसे घर ले जाती हैं। यहां एक अनपेक्षित सच सामने आता है: जियांग दादी का बेटा वही लिन साहब हैं। घर में रहते हुए वह एहसान चुकाने के साथ अपनी ‘किस्मत’ की कड़ी समझने लगती है—लेकिन इसी बीच उसे नीयतों में दरारें दिखती हैं। वफादार दिखने वाले सहायक के आसपास अजीब सुराग उभरते हैं, जैसे शांत से घर में धीरे-धीरे ज़हर की चाल बुनी जा रही हो। क्या वह सच का चेहरा सामने ला पाएगी? किस पर भरोसा करे, और अपनी ‘कथित बदकिस्मती’ से सचमुच आज़ाद हो सकेगी?