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सोहराय से रोज़गार तक : झारखंड के चिरूडीह गांव ने कैसे रचा अपना विकल्प? #sohrai #jharkhand #tribal

Vikalp Samvad

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सोहराय से रोज़गार तक : झारखंड के चिरूडीह गांव ने कैसे रचा अपना विकल्प? #sohrai #jharkhand #tribal

203 просмотра · 13 дней назад
Vikalp Samvad
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 झारखंड के रांची जिले के तमाड़ प्रखंड का चिरूडीह आज ‘Artist Village’ के नाम से जाना जाता है। लेकिन इस पहचान के पीछे सिर्फ रंगों से सजी दीवारों की कहानी नहीं है। यह कहानी है एक पारंपरिक कला को नए संदर्भ में आगे बढ़ाने, समुदाय को उससे जोड़ने और उससे आजीविका के रास्ते तलाशने की। अप्रैल 2024 में फाइन आर्ट्स के छात्र मनीष महतो ने अपने घर की दीवार पर सोहराय कला बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे गाँव की महिलाओं और बच्चियों ने इसे सीखना शुरू किया और फिर बच्चे भी इस पहल से जुड़ते गए। आज चिरूडीह में सोहराय सिर्फ दीवारों पर नहीं दिखाई देती। कागज़, कपड़े और कैनवास पर भी यह कला आकार ले रही है। इसके साथ महिलाओं के लिए अपने हुनर को काम और आय में बदलने की संभावनाएँ भी बन रही हैं। सोहराय झारखंड की पारंपरिक भित्ति चित्रकला है, जिसका गहरा रिश्ता प्रकृति, खेती और आदिवासी जीवन से रहा है। चिरूडीह में यही परंपरा अब नई पीढ़ी के हाथों में एक नए रूप में आगे बढ़ रही है। क्या किसी पारंपरिक कला को बचाने का रास्ता उसे आज की आजीविका से जोड़ने में भी हो सकता है? चिरूडीह की कहानी इसी सवाल और उसके बीच बनते एक स्थानीय विकल्प को सामने रखती है। देखिए विकल्प संवाद की यह वीडियो स्टोरी—जहाँ हम तलाशते हैं ऐसे स्थानीय अनुभव, हुनर और पहल, जो अपने आसपास की परिस्थितियों के बीच विकल्प की राह बनाते हैं। #विकल्पसंवाद #SohraiArt #Chirudih #ArtistVillage #Jharkhand #TraditionalArt #AdivasiArt #LocalEconomy #Livelihood #RuralIndia