AADESH CHANDIKA - Most Powerful Durga Song | Navratri Special 2026 | Chandika Mata Bhajan
ARPIT DWIVEDI и Akhilesh Gadarwara
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AADESH CHANDIKA - Most Powerful Durga Song | Navratri Special 2026 | Chandika Mata Bhajan
297 просмотров · 7 дн. назад
ARPIT DWIVEDI и Akhilesh Gadarwara
297 просмотров · 7 дн. назад
🔱 AADESH CHANDIKA 🔱 | The Most Fierce & Powerful Roop of Maa Durga
Jai Mata Di! Presenting the Official Music Video of "Aadesh Chandika" - A powerful tribute to Maa Chandika, the destroyer of evil.
If this song gave you goosebumps, comment JAI MATA DI 🙏
🎧 Song Credits:
Song: Aadesh Chandika
Singer / Music / Lyrics: AI Assisted music /ARPIT DWIVEDI
Video / Edit: AI Tool / ARPIT DWIVEDI
Label: Eight X Bhakti
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Lyrics:
जब-जब धरती काँप उठे
जब-जब अधर्म बढ़ जाए...
जब शक्ति को ललकारे अंधकार...
तब कौन आती है?
वो...
जो शस्त्र भी है, शांति भी है
जो काल भी है, करुणा भी है...
जय माँ!
जय माँ!
जय जय चण्डिका!
सिंह पे सवार आई माँ
हाथों में अग्नि की धार आई माँ!
असुरों का अभिमान जलाने
चण्डिका बनकर आई माँ!
जय जय दुर्गे!
जय जय काली!
जय जय अम्बे भवानी!
जहाँ-जहाँ अंधकार खड़ा
वहाँ-वहाँ माँ की शक्ति जगी!
जय जय दुर्गे!
जय जय काली!
माँ ही जग की ज्योति जगी!
जब सृष्टि थी निद्रा में डूबी
जब चारों ओर था मौन
मधु-कैटभ के घोर अहंकार ने
मचा दिया था रण का शोर।
तब योगनिद्रा की शक्ति जागी
ब्रह्मा ने माँ को पुकारा
अंधकार से ज्योति निकली
माँ ने संकट को संवारा।
न कोई भय
न कोई हार
माँ के नाम से काँपे संसार।
जिस शक्ति से सृष्टि चले
वही शक्ति है माँ।
जिस शक्ति से काल भी डरे
वही भक्ति है माँ।
जब कोई राह नज़र न आए
जब कोई साथ खड़ा न हो...
एक बार माँ को पुकार लेना
फिर डरने की बात न हो।
सिंह पे सवार आई माँ
हाथों में अग्नि की धार आई माँ!
महिष के मद को मिटाने
रण में हुंकार आई माँ!
जय जय दुर्गे!
जय जय काली!
जय जय अम्बे भवानी!
महिषासुर का बढ़ा अभिमान
देवों से छिन गया सम्मान।
स्वर्ग हुआ असुरों के अधीन
काँप उठा सारा त्रिभुवन।
तब देवों की शक्ति एक हुई
एक ज्योति में ज्योति मिली
शिव का तेज, विष्णु का तेज
सबसे माँ की शक्ति बनी।
हाथों में अस्त्र...
नेत्रों में ज्वाला...
सिंह बना माँ का रखवाला।
रण में गरजी चण्डिका
धरती ने देखा रूप महान
महिष के भीतर छिपा अहंकार
माँ ने कर दिया उसका अंत।
नारी नहीं केवल करुणा
नारी ही प्रचण्ड प्रहार।
जहाँ शक्ति का अपमान हुआ
वहीं उठा माँ का अवतार।
माँ तू शक्ति...
माँ तू भक्ति...
माँ तू ही आधार...
तेरे चरणों में झुक जाए
मन का सारा अहंकार...।
दुर्गे दुर्गे...
जय माँ दुर्गे...
जय जय माँ भवानी...
फिर आया रक्तबीज...
जिसका रक्त बने नया शत्रु।
एक बूँद गिरे धरती पर
उतने ही दानव उठें।
रणभूमि बढ़ती जाए
सेना बढ़ती जाए
देवों के चेहरे पर चिंता छाए...
लेकिन माँ की शक्ति के आगे
असुरों की चाल कहाँ टिक पाए?
चण्डिका ने रूप सँवारा
काली ने रण को घेरा
हर गिरती रक्त की बूँद को
धरती तक पहुँचने से पहले रोका।
एक-एक करके टूटे दानव
टूटा उनका अभिमान।
माँ के आगे टिक न पाया
अधर्म का कोई निशान।
चण्ड-मुण्ड का अंत हुआ
अंधकार का भंग हुआ।
शुम्भ उठा...
निशुम्भ उठा...
फिर रण में तूफान हुआ।
देवियाँ अनेक रूपों में आईं
शक्ति ने शक्ति को पहचाना
जिसे संसार अलग-अलग समझे
माँ ने दिखाया सब एक है।
एक शक्ति...
एक ज्योति...
एक ही माँ के रूप अनेक।
सिंह पे सवार आई माँ!
तीनों लोक सँवार आई माँ!
शुम्भ-निशुम्भ का गर्व मिटाने
चण्डिका बनकर आई माँ!
जय जय दुर्गे!
जय जय काली!
जय जय अम्बे भवानी!
रक्त में रण
आँखों में ज्वाला
हृदय में माँ की शक्ति!
जो माँ को दिल से याद करे!
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► Disclaimer: This is a devotional presentation. All visuals are artistic representation of Goddess Chandika generated by AI Tool.
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