“कौन कहता है क़िस्मत कुछ नहीं होती है | बग़ैर क़िस्मत कुछ नहीं होता, Mashahoor सूफ़ियाना क़व्वाली”
Dhun Vibe
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“कौन कहता है क़िस्मत कुछ नहीं होती है | बग़ैर क़िस्मत कुछ नहीं होता, Mashahoor सूफ़ियाना क़व्वाली”
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बग़ैर क़िस्मत के कुछ नहीं होता | दिल छू लेने वाली सूफ़ियाना क़व्वाली
“कौन कहता है क़िस्मत कुछ नहीं होती है,
हम कहते हैं—बग़ैर क़िस्मत के कुछ नहीं होता है...”
यह सूफ़ियाना क़व्वाली इंसान की मेहनत, मुक़द्दर, सब्र, दुआ और मालिक की मर्ज़ी के रिश्ते को बयां करती है। ज़िंदगी में इंसान मेहनत करता है, सपने देखता है और मंज़िल पाने की कोशिश करता है, लेकिन कुछ फ़ैसले ऐसे होते हैं जो हमारे हाथ में नहीं होते।
कभी फ़क़ीर बादशाह बन जाता है, कभी बादशाह फ़क़ीर हो जाता है। कभी वर्षों की कोशिश एक पल में रंग लाती है और कभी मंज़िल सामने होकर भी दूर रह जाती है। यही तो मुक़द्दर का खेल है।
इस क़व्वाली का संदेश है—
मेहनत करते रहो, दुआ करते रहो, जो मिला उसका शुक्र करो और जो नहीं मिला उसका सब्र करो।
🎵 मुखड़ा:
“कौन कहता है क़िस्मत कुछ नहीं होती है,
हम कहते हैं—बग़ैर क़िस्मत के कुछ नहीं होता है।”
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