meena Highcourt मीणा हाईकोट nagelpyrivas दौसा full history
all india fact
0:00 / 0:00
meena Highcourt मीणा हाईकोट nagelpyrivas दौसा full history
1 096 просмотров · 4 г. назад
all india fact
3,44 тыс. подписчиков
1 096 просмотров · 4 г. назад
जिले के नांगल राजावतान तहसील स्थित मीणा समाज की हथाई (चबूतरा) को मीणा हाईकोर्ट के (Meena High Court in Dausa) नाम से जाना जाता है. किसी भी समाज में कुरीतियों को दूर करने के लिए मीणा पंचायत यानी मीणा हाईकोर्ट की ओर से सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं. समाज के पंच मिलकर मीणा हाईकोर्ट में निर्णय लेते हैं. इसमें समाज के लोगों को भी सुझाव लेने के लिए जोड़ा जाता है और फिर एकजुट होकर निर्णय लिया जाता है. क्योंकि दौसा जिले के पचवारा इलाके में एसटी वर्ग में मीणा जाति की संख्या अधिक है.नांगल प्यारीवास बना मीणा हाईकोर्ट...राजस्थान के दौसा जिले में एक छोटी सी जगह नांगल प्यारीवास को चूडियावास कांड ने हाईकोर्ट बना डाला. स्थानिय लोगों के बताए अनुसार 16 जुलाई 1993 को एक विवाहिता प्रेमदेवी ने अपनी मां अमरी देवी व उसके प्रेमी चाचा घासी के साथ मिलकर पती भगवानाराम की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया था. इस घटना की एफआईआर नांगल राजावतान थाने में आईपीसी की धारा 302 में दर्ज हुई. पुलिस की कार्रवाई से असन्तु़ष्ट लोगों में आक्रोश व्यापत हो गया और समाज के लोगों ने प्रेमदेवी के ससुराल तीतरवाड़ा में खाप पंचायत आयोजित की. जो बडी पंचायत थी
पंचायत में भगवानाराम की हत्या करने की बात कबुल कर ली. इसी मामले को लेकर 24 अगस्त 1993 को चूडियावास गांव में 11 गांवों की महापंचायत आयोजित हुई और इसी पंचायत के पंच पटेलों ने अमरी व उसके प्रेमी घासी को हत्या का दोषी करार देते हुए दोनों को देश निकाला की सजा देने के साथ ही गांव में निर्वस्त्र कर घुमाने की सजा सुना दी गई. पंचायत के फैसले के अनुसार दोनों को निर्वस्त्र कर मूंह काला किया गया. बाल काटकर गधे पर घासी को बैठा दिया गया और गधे की डोर अमरी को थमा दी गई. दोनों का चूडियावास गांव में जूलूस निकालकर पैदल नांगल राजावतान लाया गया. इसी बीच दौसा व नांगल राजावतान पुलिस प्यारीवास की झिलमिल नदी के पास से 8 पंचों को गिरफ्तार कर ले गई. इस फैसले व कृत्य के खिलाफ नांगल राजावतान थाना पुलिस ने 24 अगस्त को मामला दर्ज कर लिया. जो बडा मामला बन गया था
थाने में आग लगाकर छुड़ा ले गए थे पंचों कोलोग मानते हैं कि पंचों की ओऱ से सुनाया गया फैसला कानूनी रुप से सही नहीं था, लेकिन पुराने जमाने में खाप पंचायत ऐसे फैसले सुनाती रहीं हैं. इसी सोच व परम्परा के चलते पंचों की गिरफ्तारी से इलाके की जनता भड़क गई. कुछ लोगों ने न्यायालय में पंचों की जमानत याचिका भी लगाई गई, लेकिन न्यायालय ने जमानत खारिज कर दी. इसके बाद पूर्वी राजस्थान के कद्दावर नेता डॉक्टर किरोड़ी लाल ने इस आंदोलन की कमान अपने हाथों में ली. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने नांगल राजावतान थाने को आग लगाकर पुलिस की गिरफ्त से सभी 8 पंचों को छुड़ा लिया. इसके बाद फिर एक मामला दर्ज हुआ और यहां की ये खाप पंचायत क्षेत्र में मीणा हाईकोर्ट के नाम से जानी जाने लगी.
fb ER raaz Sharma bhaghi
fb dharamveer meena SANTHA
Instagram follow --Raaz Sharma 347
Instagram follow -- dharmveer Meena 2071993