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परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु | बालकाण्ड दोहा 46 | सरल अर्थ एवं भावार्थ | रामचरितमानस

Bhakti Sagar Prayagraj01

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परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु | बालकाण्ड दोहा 46 | सरल अर्थ एवं भावार्थ | रामचरितमानस

35 просмотров · 12 дней назад
Bhakti Sagar Prayagraj01
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श्रीरामचरितमानस | बालकाण्ड | दोहा 46 परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु। प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदय अधिक संतापु॥ इस वीडियो में श्रीरामचरितमानस के इस सुंदर दोहे का सरल अर्थ, भावार्थ और प्रसंग समझाया गया है। यह प्रसंग प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और भगवान की महिमा से जुड़ा हुआ है। 🙏 जय श्रीराम 🚩 हर हर महादेव 🔱 📿 भक्ति सागर प्रयागराज 01 @Bhaktisagarprayagraj01 वीडियो पसंद आए तो Like 👍 करें, Share करें और चैनल को Subscribe 🔔 जरूर करें। #श्रीरामचरितमानस #बालकाण्ड #दोहा46 #रामचरितमानस #जयश्रीराम #हरहरमहादेव #रामायण #भक्तिसागर #BhaktisagarPrayagraj01