जिसे सबसे ज्यादा चाहा, उसी को छोड़ दिया | गुनाहों का देवता | चंदर और सुधा की अधूरी प्रेम कहानी
kahaniya anant
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जिसे सबसे ज्यादा चाहा, उसी को छोड़ दिया | गुनाहों का देवता | चंदर और सुधा की अधूरी प्रेम कहानी
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क्या कभी ऐसा प्यार देखा है, जिसमें प्रेम से ज्यादा त्याग हो… और वही त्याग एक दिन जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाए?
धर्मवीर भारती का कालजयी उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ चंदर और सुधा की ऐसी प्रेम कहानी है, जिसमें प्रेम है, समर्पण है, त्याग है और एक ऐसा फैसला है जो दोनों की जिंदगी बदल देता है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि में पली-बढ़ी चंदर और सुधा की मासूम दोस्ती कब गहरे प्रेम में बदल जाती है, उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। लेकिन जब सुधा के विवाह का समय आता है, चंदर अपने प्रेम को स्वीकार करने के बजाय त्याग और आदर्श का रास्ता चुनता है।
क्या चंदर का फैसला सही था?
क्या सच्चे प्रेम को त्याग देना ही महानता है?
और सुधा के चले जाने के बाद चंदर को अपने फैसले की कीमत क्या चुकानी पड़ी?
यह कहानी सिर्फ़ चंदर और सुधा की नहीं, बल्कि उस प्रेम की कहानी है जिसे समय रहते शब्द नहीं मिल सके।
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