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कैलाश की धड़कन @StaticVibes91 #shiv #shankar #mahadev #kailash #mukhda #neelkanth #ganga #chand

MusiSapien

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कैलाश की धड़कन @StaticVibes91 #shiv #shankar #mahadev #kailash #mukhda #neelkanth #ganga #chand

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आलाप जहाँ शब्द भी मौन हो जाएँ, जहाँ साँसें ध्यान बन जाएँ, जहाँ रात निगल जाए सूरज— वहीं तेरी जटा से भोर उतर आए… महादेव… महादेव… मुखड़ा कैलाश की चट्टानों में, तेरी धड़कन सुनाई दे, ब्रह्मांड के हर कण में, तेरी ही अग्नि दिखाई दे। तू आँधी भी, तू शांति भी, तू अंत भी, शुरुआत भी, जिस ओर उठे मेरी नज़र— वहाँ तू ही तू, भोलेनाथ ही। हर हर महादेव! (हर हर महादेव!) जटाओं में तेरी गंगा जैसे, आकाश से कोई नदी उतरी, माथे पर ठहरा चाँद तेरा, जैसे रात की आँख हो ठहरी। गले में सर्प, भस्म का वस्त्र, फिर भी कैसा राजसी रूप, श्मशान की राख में बैठा, तू जीवन का लिखता स्वरूप। तेरी आँख खुले तो काल काँपे, तेरी आँख झुके तो जग सोए, डमरू की एक थाप पड़े तो, मौन भी मंत्रों में खोए। मुखड़ा कैलाश की चट्टानों में, तेरी धड़कन सुनाई दे, ब्रह्मांड के हर कण में, तेरी ही अग्नि दिखाई दे। तू आँधी भी, तू शांति भी, तू अंत भी, शुरुआत भी— मेरे भीतर जो शून्य खड़ा, उस शून्य की भी तू ज्योति ही। हर हर महादेव! (हर हर महादेव!) जब समुद्र ने विष उगला था, जब दिशाएँ काँप उठी थीं, तब तूने अपने कंठ में, दुनिया की सारी पीड़ा रख ली थी। नीला हुआ वो कंठ तेरा, पर आकाश भी फीका पड़ जाए, त्याग की ऐसी लौ जली कि, युगों का अंधकार जल जाए। मैं क्या माँगूँ तुझसे, शंकर, जब तूने सब कुछ दे रखा है? मेरे हाथों की रेखाओं से पहले, तूने मेरा रास्ता लिख रखा है। गिरूँ अगर तो धूल बनूँ, उठूँ तो तेरा नाम बनूँ, मिट जाऊँ तो क्या डर है— तेरी कथा का एक अक्षर बनूँ। डमरू बजे—तो नभ फट जाए, त्रिशूल उठे—तो काल ठहर जाए, भस्म उड़े—तो रात सिमट जाए, भोले का नाम—तो भय मिट जाए! बम बम भोले! बम बम भोले! हर हर महादेव! तू हिमालय की मौन शिखा, तू ज्वालामुखी की गर्जना, तू बूंद में छिपा समंदर, तू कण में पूरा ब्रह्मांड बना। तू साँसों का पहला स्वर है, तू अंतिम मौन की बात है, जिसे दुनिया “शिव” कहती है— वही मेरी आत्मा की रात है, वही मेरी आत्मा की प्रभात है। हर हर महादेव… (हर हर महादेव…) शिव ही शून्य… शिव ही अनंत… शिव ही आरंभ… शिव ही अंत…