भगवद्गीता अध्याय 7 | ज्ञान-विज्ञान योग | भगवान को जानना ही नहीं, अनुभव करना भी जरूरी है |
Kanha ki pyari
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भगवद्गीता अध्याय 7 | ज्ञान-विज्ञान योग | भगवान को जानना ही नहीं, अनुभव करना भी जरूरी है |
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Kanha ki pyari
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🙏 जय श्री कृष्ण 🙏 राधे राधे ❤️
श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय — ज्ञान-विज्ञान योग में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपने वास्तविक स्वरूप, अपनी माया, प्रकृति और भक्ति का गहरा ज्ञान देते हैं।
श्री कृष्ण बताते हैं कि यह पूरा संसार उनकी ही शक्ति से जुड़ा हुआ है। जल का स्वाद, सूर्य का प्रकाश, अग्नि का तेज और जीवों में मौजूद चेतना—हर जगह उसी परम शक्ति की झलक है। 🌺
✨ गीता का संदेश:
भगवान को केवल जानना नहीं, उन्हें अपने जीवन में अनुभव करना ही सच्चा ज्ञान है।
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🌸 “राधे राधे” 🌸
🙏 जय श्री कृष्ण | हरि ॐ तत्सत 🙏
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