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राजा की 3 शर्तों से पूरा राज्य हैरान, जिनको सुनकर बड़े बड़े राजाओं के होश उड़ गए! hindi story

ॐ कहानियाँ

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राजा की 3 शर्तों से पूरा राज्य हैरान, जिनको सुनकर बड़े बड़े राजाओं के होश उड़ गए! hindi story

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उज्जैनगढ़ का राजदरबार आज पूरी तरह खचाखच भरा हुआ था। दरबार की ऊंची-ऊंची नक्काशीदार दीवारों पर जलती हुई मशालें रोशनी तो बिखेर रही थीं, लेकिन माहौल में एक अजीब सी खामोशी फैली थी। सिंहासन पर बैठे महाराज विक्रमादित्य के चेहरे पर उम्र की थकान साफ दिखाई दे रही थी। महाराज की अपनी कोई औलाद नहीं थी। उन्होंने बचपन में ही अपनी अनाथ भांजी 'दिशा' को अपनी बेटी की तरह पाला था। राजकुमारी दिशा न सिर्फ देखने में अत्यंत सुंदर थीं, बल्कि राज्य के सारे पुराने शास्त्रों और राजनीति की उन्हें गहरी समझ थी। महाराज विक्रमादित्य ने अपनी भारी और गंभीर आवाज में दरबार को संबोधित किया— महाराज विक्रमादित्य: "दरबारियों, जमींदारों और दूर-दूर से पधारे राजकुमारों... मेरी आयु अब ढलने लगी है। इस राज्य को एक ऐसे उत्तराधिकारी की आवश्यकता है, जो मेरे बाद इस प्रजा को अपनी संतान की तरह संभाल सके। आज मैं अपनी बेटी दिशा के स्वयंवर की घोषणा करता हूँ!" दरबार में मौजूद बड़े-बड़े राजकुमारों के चेहरे खुशी से खिल उठे। लेकिन तभी महाराज ने अपना हाथ उठाकर उन्हें शांत रहने का इशारा किया। महाराज विक्रमादित्य: "लेकिन ठहरिए! यह कोई साधारण स्वयंवर नहीं होगा, जहाँ केवल धनुष तोड़कर या तलवार चलाकर राजकुमारी का हाथ जीत लिया जाए। मुझे ऐसा राजा नहीं चाहिए जो केवल बलवान हो, मुझे ऐसा इंसान चाहिए जो लालची न हो और जिसके दिल में इस प्रजा के लिए दर्द हो। इसलिए, जो पुरुष मेरी तीन कठिन शर्तों को पूरा करेगा, वही मेरी बेटी और इस राज्य का हकदार बनेगा!" 🎬 Scene 2: 3 कठिन शर्तों का ऐलान Narrator: महाराज के इशारे पर महामंत्री ने आगे बढ़कर एक ताम्रपत्र (Copper Plate) खोला और राज दरबार में तीनों शर्तें जोर-जोर से पढ़कर सुनाईं— महामंत्री: "पहली शर्त—""उम्मीदवार को अपनी पूरी धन-दौलत और जायदाद राजकोष में दान करनी होगी। उसके पास एक भी तिनका या पैसा नहीं रहेगा। बिना पैसों के, शून्य से शुरुआत करके उसे 7 दिनों के भीतर राज्य के सबसे गरीब और बंजर गाँव 'पिंडारा' को अपने दम पर आत्मनिर्भर बनाना होगा।" दरबार में फुसफुसाहट शुरू हो गई। राजकुमार एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। महामंत्री: "दूसरी शर्त—""राजधानी के बाजारों में बिचौलियों और जमाखोरों के कारण अनाज और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। उम्मीदवार को बिना किसी सेना या बल-प्रयोग के, केवल अपनी बुद्धि से 3 दिनों के भीतर महंगाई पर नियंत्रण पाना होगा।" महामंत्री: "और तीसरी शर्त—""उम्मीदवार को एक ऐसा ठोस मार्ग प्रस्तुत करना होगा जिससे राज्य की गरीब जनता पर एक भी नया कर (Tax) लगाए बिना राजकोष हमेशा सोने-चांदी से भरा रहे और राज्य समृद्ध बने।" ये शर्तें सुनते ही दरबार में सन्नाटा छा गया। पड़ोसी राज्य का अहंकारी राजकुमार विक्रमसिंह अपनी जगह से उठा और जोर से हंसने लगा।