51 शक्तिपीठों का सबसे बड़ा रहस्य: साक्षात 'अग्नि रूप' में आज भी जागृत हैं मां ज्वाला जी!
Darshan Bhakti Marg
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51 शक्तिपीठों का सबसे बड़ा रहस्य: साक्षात 'अग्नि रूप' में आज भी जागृत हैं मां ज्वाला जी!
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51 शक्तिपीठों का सबसे बड़ा रहस्य: बिना किसी मूर्ति के, साक्षात 'अग्नि रूप' में आज भी जागृत हैं मां ज्वाला जी!
ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच छिपी देवभूमि हिमाचल की वो घाटी... जहां हवाओं में सिर्फ ठंडक नहीं, बल्कि एक दिव्य गर्माहट है। एक ऐसी जगह जहां सदियों से विज्ञान और आस्था के बीच एक महायुद्ध चल रहा है। एक ऐसा रहस्य, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, भूवैज्ञानिकों और यहां तक कि इतिहास के सबसे शक्तिशाली राजाओं के घमंड को भी खाक में मिला दिया। आज हम आपको ले चल रहे हैं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पावन शक्तिपीठ...मां ज्वाला जी के दर पर। आइए जानते हैं उस दिव्य गर्भगृह का पूरा सच और इतिहास, जहां जलती आग आज भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य है।
सनातन परंपरा के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि यह सृष्टि। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, तब महादेव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए।
पूरे भारतवर्ष और पड़ोसी देशों में जहां-जहां सती के अंग गिरे, वे पावन स्थल 'शक्तिपीठ' कहलाए। मान्यता है कि इस कांगड़ा घाटी में माता सती की 'जिह्वा' यानी जीभ गिरी थी। क्योंकि जीभ अग्नि का कारक है, इसलिए यहां माता किसी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं साक्षात अग्नि की लपटों के रूप में प्रकट हुईं। इसीलिए इस पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा अनोखा मंदिर है, जहाँ किसी मूर्ति की नहीं बल्कि सिर्फ ज्योतियों की पूजा की जाती है।
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