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कपड़ा गायब करनेका आरोप मझु पर लगा—वापसी पजिं जिका नेदसू री पाली का सच खोला

न्याय की कहानियाँ (My decision)

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कपड़ा गायब करनेका आरोप मझु पर लगा—वापसी पजिं जिका नेदसू री पाली का सच खोला

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न्याय की कहानियाँ (My decision)
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नोएडा की एक परि धान नि र्मा ण इकाई मेंउनसठ वर्षी य लाइन प्रमखु शारदा ति वारी वर्षों सेसि लाई कर्मचर्म ारि यों की गति , गणु वत्ता और सरुक्षा सभं ालती हैं। जब वह बि ना पर्या प्त वि श्राम के कराई जा रही असरुक्षि त अति रि क्त पाली का वि रोध करती हैं, तो दो दि न बाद महँगेकपड़ेके रोल गायब होनेका आरोप उन्हींपर लगा दि या जाता है। उनकी नि जी अलमारी की तलाशी होती हैऔर यवु ा महि ला कर्मचर्म ारि यों को चेतावनी दी जाती हैकि वेउनका पक्ष न लें। लेकि न शारदा भावनात्मक बहस की जगह कपड़ा जारी करनेवाली पर्चि यर्चि ों, लौटेकपड़ेके वजन और कटाई-कक्ष की समयबद्ध प्रवि ष्टि यों को जोड़ती हैं। अभि लेख बतातेहैंकि अतं र एक बि ना दर्ज नमनू ा-नि र्मा ण के दौरान पदै ा हुआ था। कार्यकर्य र्ता समि ति अति रि क्त पाली की व्यवस्था की समीक्षा करती है, शारदा का पद लौटता हैऔर जि म्मेदारी तय होती है। फि र भी न्याय मि लनेके बाद उनका कठि न प्रश्न बाकी रहता है—क्या वह उसी कारखानेमेंरहें जि सनेउन्हेंचपु करानेकी कोशि श की? यह कहानी वद्ृ ध महि ला श्रमि कों की गरि मा, कार्यस्र्य थल प्रति शोध, दस्तावेजी सच, सरुक्षा और उत्तराधि कार की है। परूी कहानी सनिुनिए और टि प्पणी मेंबताइए—सम्मान लौटनेके बाद भी क्या टूटा भरोसा परूी तरह लौट सकता है?