इश्क़-ए-मसीह का दरिया | Ishq-E-Masih Ka Dariya | Hindi Urdu Christian Gospel Qawwali
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इश्क़-ए-मसीह का दरिया | Ishq-E-Masih Ka Dariya | Hindi Urdu Christian Gospel Qawwali
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इश्क़-ए-मसीह का दरिया | Ishq-E-Masih Ka Dariya | Hindi Urdu Christian Gospel Qawwali
Chorus
जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे, तो रहमतों के दरिया बहा देना,
जब नफ़रतें बढ़ने लगें, तो इश्क़-ए-मसीह से दिल सजा देना।
Verse 1
दुनिया की भीड़ में भटका हुआ इन्सान,
हर मोड़ पर है आज अंधेरे का गुमान।
ऐ मेरे ख़ुदा तू अपनी रोशनी दिखा,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 2
हर जख्म पर तू अपने करम का मरहम रख,
कमजोर इस जहां में तू अपना कदम रख।
उम्मीद की किरण से रास्तों को रोशन कर,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 3
जब दिल के शीशे पर गम के दाग आएं,
और आंसुओं के समंदर उमड़ के जाएं।
तू अपनी सांत्वना की छांव में बिठा लेना,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 4
सूली पे जो बहा था वो पाकदामन लहू,
उससे धुल जाए हर दिल का मैला गुबार वो।
उस पाक प्यार की खूश्बू से जग को महका देना,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 5
अहंकार के आंधी में तिनका है ये जहां,
तू रहमतों की बारिश बरसा दे मेहरबां।
इंसानी दिलों से ये दीवारें मिटा देना,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 6
भटके हुओं को फिर से तू राह दिखा देना,
हर एक प्यासे को जीवन का जल पिला देना।
तेरी पनाह में हमको हर पल बसा लेना,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Verse 7
'अल्फ़ाज़' हर दुआ में तेरा ही नाम गाए,
सूली का प्यार हर दिल की प्यास बुझाए।
इस रूह के गुलशन को फूलों से सजा देना,
Chorus: जब ज़ुल्मत-ए-बदी बढ़ने लगे...
Song Written By Brother Vipul Manik Shinde
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