Перейти к содержимому

हरतालिका तीज 2026 सम्पूर्ण व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha 🙏 #hartalikateej #shivparvati

Paavan Bhakti Official

0:00 / 0:00

हरतालिका तीज 2026 सम्पूर्ण व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha 🙏 #hartalikateej #shivparvati

28 просмотров · 5 дней назад
Paavan Bhakti Official
7 подписчиков
28 просмотров · 5 дней назад
अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए किया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम का प्रतीक है। सुनिए यह पावन व्रत कथा, जिसमें माता पार्वती की कठोर तपस्या और शिव जी के प्रकट होने का अद्भुत वर्णन है। 👉 हरतालिका तीज की सही पूजा विधि, सामग्री और पारणा का समय यहाँ देखें:    • हरतालिका तीज 2026: सम्पूर्ण पूजा विधि और स...   🙏 'Paavan Bhakti' को सब्सक्राइब करें और प्रतिदिन ऐसी ही पुण्यदायी कथाओं का श्रवण करें। हरतालिका तीज व्रत कथा: एक बार भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराने के उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी। श्री भोलेशंकर बोले- हे गौरी! पर्वतराज हिमालय पर स्थित गंगा के तट पर तुमने अपनी बाल्यावस्था में बारह वर्षों तक अधोमुखी होकर घोर तप किया था। इतनी अवधि तुमने अन्न न खाकर पेड़ों के सूखे पत्ते चबा कर व्यतीत किए। माघ की विक्राल शीतलता में तुमने निरंतर जल में प्रवेश करके तप किया। वैशाख की जला देने वाली गर्मी में तुमने पंचाग्नि से शरीर को तपाया। श्रावण की मूसलधार वर्षा में खुले आसमान के नीचे बिना अन्न-जल ग्रहण किए समय व्यतीत किया। तुम्हारे पिता तुम्हारी कष्ट साध्य तपस्या को देखकर बड़े दुखी होते थे। उन्हें बड़ा क्लेश होता था। तब एक दिन तुम्हारी तपस्या तथा पिता के क्लेश को देखकर नारदजी तुम्हारे घर पधारे। तुम्हारे पिता ने हृदय से अतिथि सत्कार करके उनके आने का कारण पूछा। नारदजी ने कहा- गिरिराज! मैं भगवान विष्णु के भेजने पर यहां उपस्थित हुआ हूं। आपकी कन्या ने बड़ा कठोर तप किया है। इससे प्रसन्न होकर वे आपकी सुपुत्री से विवाह करना चाहते हैं। गिरिराज गद्‍गद हो उठे और प्रसन्नचित होकर बोले- यदि स्वयं विष्णु मेरी कन्या का वरण करना चाहते हैं तो भला मुझे क्या आपत्ति हो सकती है। तुम्हारे पिता की स्वीकृति पाकर नारदजी विष्णु के पास गए। मगर इस विवाह संबंध की बात जब तुम्हारे कान में पड़ी तो तुम्हारे दुख का ठिकाना न रहा। तुमने अपनी सखी को बताया - मैंने सच्चे हृदय से भगवान शिवशंकर का वरण किया है, किंतु पिता ने मेरा विवाह विष्णुजी से निश्चित कर दिया है। सखी ने कहा- संकट के मौके पर धैर्य से काम लेना चाहिए। मैं तुम्हें घनघोर जंगल में ले चलती हूं, जहां तुम्हारे पिता तुम्हें खोज भी न पाएं। वहां तुम साधना में लीन हो जाना। तुमने ऐसा ही किया। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र था। उस दिन तुमने रेत के शिवलिंग का निर्माण करके व्रत किया और रात भर मेरी स्तुति के गीत गाकर जागीं। तुम्हारी इस कष्ट साध्य तपस्या के प्रभाव से मेरा आसन डोलने लगा। मैं तुरंत तुम्हारे समक्ष जा पहुंचा और तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न होकर तुमसे वर मांगने के लिए कहा। तुमने कहा - मैं हृदय से आपको पति के रूप में वरण कर चुकी हूं, मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लीजिए। तब मैं 'तथास्तु' कह कर कैलाश पर्वत पर लौट आया। प्रातः होते ही तुमने व्रत का पारणा किया। उसी समय गिरिराज तुम्हें खोजते-खोजते वहां आ पहुंचे। तुमने उनसे कहा कि आप मेरा विवाह महादेवजी से करेंगे तभी मैं घर चलूंगी। गिरिराज मान गए और शास्त्रोक्त विधि-विधानपूर्वक उन्होंने हम दोनों को विवाह सूत्र में बांध दिया। हे पार्वती! भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था, उसी के फलस्वरूप मेरा तुमसे विवाह हो सका। मैं इस व्रत को करने वाली कुंआरियों को मनोवांछित फल देता हूं। #HartalikaTeej #हरतालिकातीज #PaavanBhakti #TeejVratKatha #ShivParvati #KevdaTrij #Teej2026 #VratKatha Related Searches: hartalika teej vrat katha 2026 teej katha hindi shiv parvati vivah katha kevda trij katha hartalika teej ki katha sunaiye nirjala vrat katha teej paavan bhakti official