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Official Video: Nirpankhi Maya || Ruhaan Bhardwaj || Gunjan Dangwal || Team Tornado || O.P Bhardwaj

Ruhaan Bhardwaj

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Official Video: Nirpankhi Maya || Ruhaan Bhardwaj || Gunjan Dangwal || Team Tornado || O.P Bhardwaj

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Official Video: Nirpankhi Maya This soulfull song is composed and penned down by my Father Mr. O.P Bhardwaj ji and sung by Ruhaan Bhardwaj.The song talks about love and loss and features Gargi Kathait and Ruhaan Bhardwaj. Singer:Ruhaan Bhardwaj Lyricist/Composer: Mr. O.P Bhardwaj Music Producer: Gunjan Dangwal Video By: Team Tornado Flutist - Ajay prasanna ji Harmonium - Ruhaan Bhardwaj Management: Arvind Bhardwaj, Gaurav Lekhwar, Ayush Panthri Sponsored by:Monika Rawat, Gandharv Bhardwaj Special thanks - pooja bhardwaj,Karishma shah, ,muneer Khan, Ankit Negi, Ayush, Deepak negi ( hotelpearl avenue ) Neeraj Samant (All family members) #NirpankhiMaya #Ruhaanbhardwaj #Garhwalisadlovesong Facebook:   / officialruhaan   Twitter:   / ruhaan_bhardwaj   Instagram:   / ruhaanbhardawaj   Lyrics 👇👇 Garhwali - तेरी निरपंखी माया की, कनी उड़ान भरीन मिन। मेरा जरा हैंस्या खेल्यां कू, क्या इनाम दियाली तिन। हाथ्योंन ( हाथों ) लगौंदी बणांग ( आग ), खुट्यौंन ( पैर ) बुझौंदी। यू रूप भी देख्याली तेरू। तेरा यूं छदमौं दगडी, भाग जरा सी जुडयूं छौ मेरू। ए लठ्याली ( बेचारी ) तेरी खट्टी माया का, कनी सवाद ( स्वाद ) चखीन ( चखना ) मिन ( मैंने )। तेरी निरपंखी............ भूली गे ( भूल गई ) तू मोलू डाली ( मोल का पेड ), जख छौं उठनू बैठणू तेरू मेरे। ( जहां तेरा मेरा उठना बैठना ) मंदिरों मा सौं करार ( कसमें ), घंडलियौं ( घण्टी ) कू बजौंणू ( बजाना ) तेरू मेरू। ए लठ्याली तेरी खट्टी माया का, कनी सवाद चखीन मिन। हे पापी रे ई मनखी ( इन्सान ) चोला ( वेश ) कू, कनू निलाम करयाली तिन। मेरा जरा हैंस्या खेल्यां कू, क्या ईनाम दियाली तिन। Hindi - तेरे बिन पंखों के प्यार की, मैंने कैसी उड़ान भरी है। मेरे थोडे से हंसी मजाक का, तूने क्या इनाम दे दिया। हाथों से आग लगाती है, और खुद पैरों से बुझाती है। तेरा ये रूप भी मैंने देख लिया। तेरे इन नखरों के साथ, मेरा थोड़ा सा भाग जुडा है। हे बेचारी तेरी इस खट्टी सी माया के, कैसे कैसे स्वाद मैनें चखे हैं। तेरी निरपंखी..... भूल गई तू मोल का पेड़, जहाँ तू और मैं बैठा करते थे। तेरी मेरी मंदिरों में ली हुई कसमें, और तेरा मेरा साथ में घण्टियौं का बजाना। हे बेचारी तेरी मेरी खट्टी...... हे पापी, इस इन्सान वेश का कैसा मिलाप तूने किया है। मेरे तेरे हंसी मजाक का, तूने क्या इनाम दिया है।