लूका (Luke) 12:22-34:- चिंता न करना और परमेश्वर को प्राथमिकता देना
BBCF Sonia Vihar
0:00 / 0:00
लूका (Luke) 12:22-34:- चिंता न करना और परमेश्वर को प्राथमिकता देना
124 просмотра · 7 месяцев назад
BBCF Sonia Vihar
137 подписчиков
124 просмотра · 7 месяцев назад
1. चिंता मत करो, बल्कि परमेश्वर पर भरोसा रखो, क्योंकि वह हमारी चिंता करता है (3:52–17:07)
संदेश में बताया गया है कि हमें इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि हम क्या खाएँगे या क्या पहनेंगे, क्योंकि परमेश्वर हमारी चिंता करता है। जैसे परमेश्वर पक्षियों की देखभाल करता है (11:06–12:54) और मैदान की सोसनों (लिलियों) को वस्त्र पहनाता है (14:09–16:20), वैसे ही वह हमारी भी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, क्योंकि हम उसकी दृष्टि में उनसे कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
चिंता करने से हमारे जीवन में कुछ भी नहीं जुड़ता; बल्कि यह हमें हानि ही पहुँचाती है (12:55–14:04)। इसलिए चिंता छोड़कर हमें परमेश्वर पर विश्वास करना चाहिए।
2. चिंता मत करो, बल्कि परमेश्वर के राज्य को खोजो, क्योंकि परमेश्वर हमारी आवश्यकताओं को जानता है (17:08–23:59)
वक्ता समझाते हैं कि संसार के लोग भौतिक वस्तुओं के पीछे भागते हैं, परन्तु मसीह के अनुयायियों के रूप में हमारा ध्यान परमेश्वर के राज्य पर होना चाहिए। परमेश्वर पहले से ही हमारी आवश्यकताओं को जानता है (18:57–19:02)।
यदि हम पहले उसके राज्य की खोज करेंगे, तो ये सब वस्तुएँ हमें दी जाएँगी (19:55–20:04)। इसका अर्थ है—परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना, उससे प्रेम करना, उसके वचन को बाँटना, और उसके राज्य के कार्य में सहभागी होना (20:52–22:24)।
3. चिंता मत करो, क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने राज्य में ले जाने का वादा किया है (24:35–33:17)
संदेश का निष्कर्ष यह है कि परमेश्वर ने अपने विश्वासयोग्य अनुयायियों को अपने राज्य में ले जाने का वादा किया है। इसलिए हमें डरने या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पूर्ण रूप से स्वयं को परमेश्वर के हाथों में सौंप देना चाहिए।
हमारा विश्वास और आज्ञाकारिता हमें स्वर्ग तक ले जाएगी—न कि हमारा धन या हमारी बीमा योजनाएँ (26:36–27:11)।
वक्ता श्रोताओं को प्रोत्साहित करते हैं कि वे स्वर्ग में धन इकट्ठा करें—अर्थात् अपने संसाधनों का उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए करें, दूसरों की सेवा करें, और उसके राज्य के कार्य को आगे बढ़ाएँ (28:49–29:17)।
#luke #bible #sermon #preaching #church #expositorysermon #sundayservice