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78. आत्मानुशासन (छंद-93 (भावार्थ), 94 (गाथार्थ))

प्रयंक शास्त्री

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78. आत्मानुशासन (छंद-93 (भावार्थ), 94 (गाथार्थ))

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प्रयंक शास्त्री
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93. व्यसनी को हिताहित का अभाव 94. बुद्धिमानों का प्रमादी होना शोचनीय