Mayabi Marich | Hindi Rap | Ram Navami Special | Hindi Rap Song | 2026
Bhakti Sagar 54_e4z
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Mayabi Marich | Hindi Rap | Ram Navami Special | Hindi Rap Song | 2026
3 053 просмотра · 2 недели назад
Bhakti Sagar 54_e4z
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Song: Mayavi Marich
Rap: Narci
Hook Vocals: Friends & Team
Vocals: Premanand Ji Maharaj
Lyrics: Narci & Traditional
Music & Arrangement: Narci
Mixing & Mastering: Xzeus
Artwork & Visuals: iKillGraphix
Recorded at Narci's Studio
ALL RIGHTS RESERVED: All vocals, lyrics (except hook part's lyrics), composition (except hook part), and music used in this song are original and solely owned by the artist. Unauthorized use, reproduction, or redistribution of any part of this content is strictly prohibited. © All Rights Reserved.
ABOUT MAYAVI MARICH TRACK
This devotional rap narrates the powerful episode of Sita Haran from the sacred epic Ramayana. The song reflects the moment when Marich, realizing the divine nature of Lord Rama as Narayan, chooses death at the Lord’s hands over a life of adharma. It also pays tribute to the heroic sacrifice of Jatayu, who fearlessly fought Ravana to protect Goddess Sita and gave his life defending dharma. Released around the sacred festival of Ram Navami, this track is a humble offering of devotion, honoring courage, sacrifice, and the eternal truth that righteousness always prevails. May the name of Shri Ram inspire strength, faith, and devotion in every heart. Jai Shri Ram.
LYRICS
[Intro]
जब मरना ही है तो प्रभु के होके मरे
कि बार-बार मरना न पड़े
[Sita]
स्वामी ये अद्भुत मृग तो देखिए
[Hook]
कंचन मृग बनकर आया सिया का अपहरण कराने
कंचन मृग बनकर आया सिया का अपहरण कराने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
[Verse]
सुबाहु भ्राता मारीच और रावण पहुँचे पंचवटी
रावण की न सीता से पल भर देखो नज़र हटी
मारीच को बोला अब सोने का बन जाना मृग
मैं बनूँगा साधु तुम आगे अपनी करो गति
जानकी के नैनों ने जैसे ही देखा स्वर्ण मृग
स्वर फिर बोल बैठा जैसे हो ये स्वप्न इक
स्वामी से वो बोली प्यारा मुझको ला दो मृग
काया जिसकी सोने जैसी लगती मानो स्वर्गिक
जानकी ने मांग करी जो, राम करेंगे पूरी वो
आँखें मेरी प्रभु की तो मैथिली में डूबी हों
मायापति जानते थे मायावी की खूबी को
अवगत होके भागे मुक्ति देने वो बहुरूपी को
तरकश बाँधा सीने से, कोदंड पे बाण धरा
जाते जाते बोले भाई रखना पीछे ध्यान ज़रा
मृग लेके मैं आता हूँ, प्रपंचों से सावधान
शूर्पणखा वो याद रहे, सज्ज रहे तेरा बाण सदा
स्वयं को ही मृत्यु का दे बैठा वो न्योता क्यूँ?
ऐसे ही वो प्रभु हाथों मरने वापिस लौटा क्यूँ?
जानता है राम ही तो तारेंगे इस पापी को
प्रभु हाथों मरने का वो छोड़े भला मौका क्यूँ?
पंचवटी वनों में वो भागे बिना कुलाहल
बुरे किए कर्मों का वो सज्ज था लेने को फल
चन्द्रहास से बेहतर उसे मृत्यु मिले प्रभु से
तभी मायापति से वो स्वयं कर रहा था छल
[Hook]
माया सोना है इसके आगे ये जगत खिलौना
कितने लोगों को जीवनभर सोने दिया न सोना
कंचन मृग बनकर आया (आज मैं भगवान के हाथ से)
सिया का अपहरण कराने (मारा जाऊँगा)
[Verse]
भेद गया था मारीच को तीर प्रभु तीखा वो
मृग हुआ ज़रा धीमा और तन लहू से भीगा जो
हुआ हवाले पीड़ा को, वो मरते मरते खेल गया
स्वर निकाला राघव का, सहायता को चीखा वो
सुनी प्रभु की वाणी सीता चिंता भीतर थामी भी
और सहमी सीता बोली ये तो वाणी है मेरे स्वामी की
देवर को वो बोली देखो स्वामी न हों संकट में
आज्ञा दे दी सीता ने देवर को वन में जाने की
टाले कैसे शब्द भला हाँ देवर माता सीता के
रेखा के भीतर बैठा के भागे वन को सीधा वह
लखन के जाते साधु आया भिक्षा बोला ग्रीवा से
द्वार पे भिक्षा मांगे रावण साधु बनके सीता से
भिक्षा लेकर आई जानकी पर रेखा के पार नहीं
साधु और सीता के मध्य रेखा वो दीवार बनी
क्रोधित होके बोला क्या ये साधु का निरादर न?
बंधन में जो भिक्षा होगी साधु को स्वीकार नहीं
रेखा जैसे पार करी, पापी की युक्ति तैयार खड़ी
बीस भुजाएँ बाहर करी, दस सर की कतार बनी
सीता है लाचार खड़ी, स्वामी को पुकार रही
थाम सिया को केशों से नारायण को ललकार करी
पापी न ये जान सका कि सीमा कैसी पार करी
हर के उसने देवी को है निश्चित अपनी हार करी
मृत्यु अब तो लंका के है स्वर्ण द्वार के बाहर खड़ी
श्री राम के हाथों अब तो निश्चित है संहार घड़ी
[Hook]
कंचन मृग बनकर आया सिया का अपहरण कराने
कंचन मृग बनकर आया सिया का अपहरण कराने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
माया का मारीच चला मायापति को भटकाने
[Outro]
दुष्ट मारीच को प्रभु ने परम पद प्रदान किया
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