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Paliwal Samaj history | पालीवाल जाति का इतिहास | कुलधारा गाँव के श्राप का रहस्य | पालीवाल ब्राह्मण

Malwa Diary History

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Paliwal Samaj history | पालीवाल जाति का इतिहास | कुलधारा गाँव के श्राप का रहस्य | पालीवाल ब्राह्मण

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पालीवाल समाज का इतिहास | History of paliwal samaj . पालीवाल समाज का इतिहास शुरू होता है आज से लगभग हजारों वर्ष पहले महाभारत काल में पालीवाल समाज के लोग महाराज हरिदास को अपना पूर्वज मानते हैं महाराज हरिदास भगवान श्री कृष्ण और देवी रुक्मणी के मध्य संवाद संदेशों का आदान प्रदान किया करते थे भगवान श्री कृष्ण जी महाराज हरिदास को प्रसन्न होकर भूमि दी थी जिससे उन्होंने अपने मन से जो याने पालीवाल ब्राह्मणों को वहां पर बताया, पालीवाल ब्राह्मण गौड़ ब्राह्मण श्रेणी में आते हैं पालीवाल लोगों को पुरोहित कहकर भी बुलाया जाता है, कई जगह पर इन्हें राजपुरोहित भी कहा जाता है, पालीवाल समाज के लोग बड़े ही मेहनती होते हैं पालीवाल समाज के लोगों में पानी को सहेजने का विलक्षण गुण पाया जाता है, यह व्यापार की कला में भी काफी माहिर होते हैं जिन्होंने इतिहास में समय-समय पर अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर बहुत सारा धन ध्यान दें अर्जित किया है | पालीवाल समाज का इतिहास हमें ले जाता है, राजस्थान के पाली शहर में परंतु यह पाली शहर भी इन्हें विदेशी आक्रांता ओं के कारण छोड़ना पड़ा और पाली से रातों-रात लाखों की संख्या में पाली वालों ने पलायन करके भारत के अन्य क्षेत्रों में बस गए फिर 18 वीं शताब्दी में भी पाली वालों का एक और पलायन होगा इस समय यह जैसलमेर के आसपास बसे हुए पाली वालों को 84 गांव ने यह पलायन किया था | इस पलायन में खाली हुए 84 गांव में से 82 गांव तो पुनः बस गए परंतु 2 गांव कुलधरा और काबा गांव आज तक नहीं बस पाए हैं | ऐसा कहा जाता है कि पालीवाल ब्राह्मण इस गांव को श्राप देकर गए थे कि है गांव कभी भी नहीं बचेंगे पाली वालों के आराध्य चतुर्भुज भगवान की आराध्य देवी माता रुक्मणी है .| 12 shreni paliwal, 42 shreni paliwal, 52 shreni paliwal.