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🚩श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 55–56 | स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण | गीता अमृतवाणी

Shradha Sanskar

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🚩श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 55–56 | स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण | गीता अमृतवाणी

6 просмотров · 1 день назад
Shradha Sanskar
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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 के श्लोक 55–56 में भगवान श्रीकृष्ण स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण बताते हैं। स्थितप्रज्ञ कौन है? उसकी बुद्धि कैसी होती है? सुख-दुःख, भय, क्रोध और मोह के समय उसका व्यवहार कैसा रहता है? इन श्लोकों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण हमें समत्व, आत्मसंयम और स्थिर बुद्धि का मार्ग समझाते हैं। 🙏 श्रीकृष्ण के दिव्य उपदेश को सरल भावार्थ सहित सुनें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। जय श्रीकृष्ण 🙏 हरि ॐ तत्सत् 🙏