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NCERT HISTORY CLASS 8 CHAPTER 4 PART 03 मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) 16वीं से 17वीं शताब्दी

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NCERT HISTORY CLASS 8 CHAPTER 4 PART 03 मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) 16वीं से 17वीं शताब्दी

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NCERT HISTORY CLASS 8 CHAPTER 4 PART 03 मुगल साम्राज्य (Mughal Empire) 16वीं से 17वीं शताब्दी #history #geography #biharboard #scent #biharteacher #bpsctre4 #bpscexam जब्त (Zabt) और जमींदारी व्यवस्था मुगल काल (विशेषकर अकबर के शासनकाल) में भू-राजस्व (land revenue) और प्रशासन को संभालने की दो बेहद महत्वपूर्ण प्रणालियाँ थीं। इन दोनों व्यवस्थाओं का मुख्य उद्देश्य साम्राज्य की आय को सुनिश्चित करना और कृषि प्रशासन को मजबूत बनाना था। 1. जब्त व्यवस्था (Zabt System) जब्त व्यवस्था मुगल सम्राट अकबर के कुशल राजस्व मंत्री राजा टोडरमल द्वारा विकसित की गई थी। इसे दहसाला व्यवस्था भी कहा जाता है। भूमि की पैमाइश (Measurement): इस व्यवस्था के तहत सबसे पहले सभी कृषि योग्य भूमि की सटीक माप (पैमाइश) की जाती थी। इसके लिए बांस के डंडों वाली कड़ियों (जरीब) का इस्तेमाल होता था। १० साल का रिकॉर्ड (10-Year Record): पिछले 10 सालों (1570 से 1580 ई.) में किस जमीन पर कौन सी फसल उगी, उसकी पैदावार कितनी हुई और बाजार में उसकी क्या कीमत थी, इसका पूरा हिसाब रखा जाता था। नकद में कर (Tax in Cash): औसत पैदावार के आधार पर टैक्स (राजस्व) का एक-तिहाई (1/3) हिस्सा तय किया जाता था, जिसे किसानों को अनाज के बजाय नकद (Cash) चुकाना पड़ता था। राजस्व चक्र (Revenue Circles): अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और फसलों के हिसाब से पूरे साम्राज्य को राजस्व मंडलों में बांटा गया था और हर फसल की अपनी अलग कर सूची (सूची-ए-दर) होती थी। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में लागू थी जहां मुगल अधिकारी जमीन का सर्वेक्षण और उसका रिकॉर्ड रख सकते थे, जैसे—उत्तर भारत, मालवा, गुजरात और लाहौर। 2. जमींदारी व्यवस्था (Zamindari System) मुगल काल में 'जमींदार' शब्द का प्रयोग उन सभी मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए किया जाता था जो किसानों से टैक्स वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करते थे। इसमें गांव के छोटे मुखिया से लेकर स्थानीय राजा तक शामिल थे। कर वसूली का अधिकार: जमींदार खुद खेती नहीं करते थे, बल्कि उन्हें अपने इलाके के किसानों से भू-राजस्व इकट्ठा करने का पैतृक (generational) अधिकार मिला हुआ था। कमीशन या हिस्सा: वसूल किए गए कुल राजस्व में से जमींदार को अपना हिस्सा (जिसे 'नानकार' कहा जाता था) रखने की अनुमति थी, जो आमतौर पर कुल कर का 10% से 25% तक होता था। स्थानीय सेना: कई बड़े जमींदारों के पास अपनी सैनिक टुकड़ियां, किले और हथियार भी होते थे, जिससे वे अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखते थे। किसानों पर प्रभाव: जमींदार अक्सर शक्तिशाली होते थे। यदि कोई मुगल अधिकारी किसानों का शोषण करता था, तो कभी-कभी जमींदार और किसान मिलकर मुगल विद्रोह भी कर देते थे।