एक नरक से निकल कर फिर जीवन जीने चल पड़ी नए रास्ते पर,क्या मालुम था कि आगे दूसरा नरक प्रतीक्षारत है।
Katha Kathan
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एक नरक से निकल कर फिर जीवन जीने चल पड़ी नए रास्ते पर,क्या मालुम था कि आगे दूसरा नरक प्रतीक्षारत है।
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Katha Kathan
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#RajniGuptkikahani,
#रजनीगुप्तकीकहानी,
रजनी गुप्त
जन्मतिथि: 2 अप्रेल 1963
यूजीसी द्वारा जेआरएफ , एमफिल , पीएचडी ( जेएनयू , नई दिल्ली )
राष्ट्रीयकृत बैंक में प्रबंधक , राजभाषा
साहित्यिक गतिविधियां
उपन्यास
कहीं कुछ और – वाणी प्रकाशन दिल्ली
किशेारी का आसमां , किताबघर प्रकाशन दिल्ली
एक न एक दिन , किताबघर प्रकाशन
कुल जमा बीस , सामयिक प्रकाशन दिल्ली
ये आम रास्ता नही , वाणी प्रकाशन दिल्ली , प्रकाशनाधीन
कहानियां
एक नई सुबह - वाणी प्रकाशन दिल्ली
हाट बाजार - नेशनल पब्लिशिंग हाउस , दिल्ली
प्रेम संबंधों की कहानियां , नमन प्रकाशन दिल्ली
संपादन
आजाद औरत कितनी आजाद - सामयिक प्रकाशन दिल्ली
मुस्कराती औरतें - सामयिक प्रकाशन दिल्ली
स्त्री विमर्श
सुनो तो सही – सामयिक प्रकाशन दिल्ली
विशेष
कहीं कुछ और – राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन ओपन यूनि के स्त्री विमर्श कोर्स में शामिल एवं सुनो तो सही – पुस्तक हिंदी साहित्य के इतिहास में शामिल।
पिछले 12 सालों से कथाक्रम , साहित्यिक पत्रिका में संपादकीय सहयोग
सम्मान
एक नई सुबह पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का सर्जना पुरस्कार एवं युवा लेखन पुरस्कार
किताब घर प्रकाशन द्वारा आर्यस्मृति साहित्य सम्मान 2006
किशोरी का आसमां- उपन्यास पर अमृतलाल नागर पुरस्कार- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान
शोध कार्य
दोनों कहानी संग्रह पर लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा एमफिल
एक न एक दिन – उपन्यास पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा एमफिल
कहीं कुछ और – उपन्यास पर केरल विश्वविद्यालय द्वारा एमफिल