जानिए बगलामुखी धाम में हर वस्तु पीले रंग की क्यों? । 4K । दर्शन। 🙏
Tilak
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जानिए बगलामुखी धाम में हर वस्तु पीले रंग की क्यों? । 4K । दर्शन। 🙏
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जय माता दी भक्तों! आप सभी को सादर प्रणाम वंदन और अभिनंदन... जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे देश में माँ आदिशक्ति देवी दुर्गा के 51 शक्ति पीठ हैं। सभी के सभी शक्तिपीठ देवी सती के ही स्वरूप माने जाते हैं। आज हम आपको जिन देवी के पावन धाम की यात्रा कराने वाले हैं, जिनकी महिमा गाने वाले हैं और जिनका पावन दर्शन करनेवाले हैं... वो हैं माता बगलामुखी देवी...
भक्तों यो तो भारत में बगलामुखी देवी के कई प्राचीन और सुविख्यात मंदिर हैं किन्तु आज हम जिस बगलामुखी धाम की यात्रा और दर्शन पर निकले हैं, वो है... परम पावन देवभूमि हिमांचल प्रदेश में..
बगलामुखी का अर्थ:
भक्तों! माता बगलामुखी नाम दो शब्दों बगल और मुख से मिलकर बना है जिनका मतलब क्रमशः लगाम और चेहरा है। इस प्रकार, व्युत्पत्तिशास्त्र द्वारा इस नाम का अर्थ है एक ऐसा चेहरा जो शासन की शक्ति है।
बगलामुखी का इतिहास:
भक्तों! आदिकाल से अबतक अभीष्ट या मनोवांछित सिद्धि हेतु माता बगलामुखी की साधना और आराधना की परंपरा है। शास्त्रों में प्रमाण हैं कि रावण, मेघनाद, अर्जुन व भीम इत्यादि सभी महायोद्धाओं द्वारा माता बगलामुखी की आराधना करके अनेक युद्ध लड़े गए। नगरकोट के महाराजा संसारचंद कटोच भी प्राय: इस मंदिर में आकर माता बगलामुखी की आराधना किया करते थे, जिनके आशीर्वाद से उन्होंने कई युद्धों में विजय पाई थी।
भेंट/भोग/नैवेद्य:
भक्तों! बगलामुखी माँ को पीतांबरी देवी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि माँ हल्दी के रंग वाले जल से प्रकट हुई थी और इसी पीले रंग के कारण ही उन्हें पीतांबरी देवी कहते हैं। बगलामुखी माँ को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए इनकी पूजा व् आराधना में पीले रंग की ही सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। बगलामुखी माता का रंग स्वर्ण के समान पीला है। इसलिए ये मंदिर और इस मंदिर की हर चीज़ पीले रंग की है। माँ पीले वस्त्र, पीले आभूषण तथा पीले पुष्पों की माला धारण करती हैं यहां तक कि प्रसाद, मौली के साथ नैवेद्य/भोग के लिए पीले रंग के फल और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं। पूजा करते वक्त साधक को भी पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए।
साधक की सावधानियाँ:
भक्तों! मां बगलामुखी की महाविद्या के रूप में उपासना रात्रिकाल में करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती है। साधनाकाल में साधक भी पीले वस्त्र और आभूषण धारण करते हैं। लोग कानूनी मामलो में जीत के लिए, अपने दुश्मन पर विजय, व्यापार में वृद्धि, ऐश्वर्य-समृद्धि तथा तंत्रसिद्धि हेतु माता बगलामुखी की महाविद्या उपासना करते हैं क्योंकि माँ के भैरव कालों के काल महाकाल हैं। इसीलिए माँ बगलामुखी द्वार पर पहुँचते ही सारी बुरी शक्तियों से मुक्ति मिल जाती है।
माँ बगलामुखी देवी साधना मन्त्र:
ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा |
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन।
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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