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क्या आपके जीवन का तूफान परमेश्वर के प्रेम से बड़ा है? Dr. Abhilasha J. Lal

Yeshu Darbar Allahabad

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क्या आपके जीवन का तूफान परमेश्वर के प्रेम से बड़ा है? Dr. Abhilasha J. Lal

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क्या आपके जीवन का तूफान परमेश्वर के प्रेम से बड़ा है? क्या आपने कभी अपने जीवन में ऐसा तूफान देखा है, जब आपको लगा हो कि अब कोई रास्ता नहीं बचा? जब परिस्थितियाँ आपके विरुद्ध हों, आपके अपने साथ छोड़ दें, प्रार्थनाओं का उत्तर दिखाई न दे और भविष्य अंधकारमय लगे? लेकिन आज मैं आपको एक ऐसी सच्चाई बताना चाहती हूँ, जो आपके जीवन को देखने का नज़रिया बदल सकती है! परमेश्वर का प्रेम केवल शांत दिनों के लिए नहीं है; वह हमारे जीवन के सबसे भयानक तूफानों में भी हमारे साथ रहता है! मत्ती 14:22–33 में हम देखते हैं कि यीशु के चेले समुद्र में तूफान से जूझ रहे थे। रात का समय था, हवा विपरीत चल रही थी और लहरें उनकी नाव को हिला रही थीं। तभी यीशु पानी पर चलते हुए उनके पास आए! ज़रा सोचिए—जिस समुद्र ने चेलों को भयभीत कर रखा था, उसी समुद्र पर यीशु चल रहे थे! जिस परिस्थिति के सामने चेले असहाय थे, उस पर यीशु का अधिकार था! जब पतरस ने यीशु की आवाज़ सुनकर नाव से बाहर कदम रखा, तो वह पानी पर चलने लगा। लेकिन जैसे ही उसने तूफान को देखा, वह डरने लगा और डूबने लगा। तब उसने पुकारा, “हे प्रभु, मुझे बचा!” और बाइबल कहती है कि यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया! मेरे प्रिय मित्र, क्या आपने इस घटना में परमेश्वर के प्रेम की गहराई को देखा? पतरस का विश्वास कमजोर पड़ गया, लेकिन यीशु ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा! पतरस डगमगाया, लेकिन यीशु ने उसे छोड़ नहीं दिया! यही है परमेश्वर के प्रेम की शक्ति—जब हमारा विश्वास डगमगाता है, तब भी हम उसकी ओर पुकार सकते हैं! आज आपके जीवन में भी आर्थिक संकट, बीमारी, पारिवारिक समस्याएँ, अकेलापन, निराशा या भविष्य का भय हो सकता है। लेकिन याद रखिए, तूफान आपकी कहानी का अंतिम अध्याय नहीं है! तो सवाल यह नहीं है कि आपके जीवन में तूफान क्यों आया। सवाल यह है: तूफान के बीच आप अपनी नज़र किस पर टिकाए हुए हैं—समस्या पर या यीशु मसीह पर? इस वीडियो में हम जानेंगे कि परमेश्वर के प्रेम की शक्ति क्या है, हम अपने दैनिक जीवन में उस प्रेम का अनुभव कैसे कर सकते हैं, और भय, चिंता तथा निराशा के बीच परमेश्वर पर भरोसा करना कैसे सीख सकते हैं। वीडियो को अंत तक देखिए, क्योंकि हो सकता है कि आज परमेश्वर का वचन आपके उसी तूफान के बीच आशा की नई किरण बन जाए! आइए, परमेश्वर के वचन से सीखें कि तूफान कितना भी बड़ा क्यों न हो, यीशु की उपस्थिति में आशा का द्वार खुला रहता है। याद रखिए: तूफान की आवाज़ से बड़ी यीशु की आवाज़ है, और आपके भय से बड़ा उसका प्रेम है! Dr. अभिलाषा J. लाल