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Gauchar historical ground

PAHADIZEEN

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Gauchar historical ground

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उत्तराखंड के चमोली जिले में लगने वाला ऐतिहासिक गौचर मेला वर्ष 1943 में शुरू हुआ था। [1]गौचर मेले का विस्तृत इतिहास इस प्रकार है: गौचर मेले का इतिहास (History of Gauchar Mela in Hindi) शुरुआत (1943): इस प्रसिद्ध मेले की शुरुआत नवंबर 1943 में हुई थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन उपायुक्त (Deputy Commissioner) श्री बरनेदी (Barnedi) ने किया था। भोटिया जनजाति की पहल: यह मेला मुख्य रूप से भोटिया जनजाति और स्थानीय लोगों की पहल पर शुरू किया गया था। भारत-तिब्बत व्यापार: शुरुआत में यह मेला भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का एक बड़ा केंद्र था। दापा, दीफू, ज्ञानिंग और थोलिंग जैसे तिब्बती क्षेत्रों से व्यापारी यहां आते थे। वस्तु-विनिमय (बार्टर सिस्टम): शुरुआती दौर में यहां पैसों से खरीद-फरोख्त नहीं होती थी, बल्कि वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) चलती थी। लोग सामान के बदले सामान (जैसे ऊन के बदले अनाज) का आदान-प्रदान करते थे। बेची जाने वाली वस्तुएं: तिब्बती व्यापारी यहां ऊन, हिरण की कस्तूरी, शिलाजीत, काला नमक और कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां बेचने आते थे। तिब्बत व्यापार बंद (1962): वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध और राजनीतिक तनाव के कारण तिब्बत के साथ होने वाला यह ऐतिहासिक व्यापार बंद हो गया। इसके बाद मेले का स्वरूप बदल गया। सांस्कृतिक और औद्योगिक मेला: व्यापार बंद होने के बाद इसे राज्य के सांस्कृतिक और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाले मेले के रूप में नई पहचान मिली। अब यह मेला उत्तराखंड की लोक संस्कृति, कला, व्यापार और कृषि प्रदर्शन का एक प्रमुख मंच है। शुरू हुआ उत्तराखंड का ऐतिहासिक गौचर मेला! पैसों से नहीं ऐसे होता था यहां ... 14 Nov 2023 — ... चमोली जिले के गौचर के मैदान में लगने वाले गौचर मेले की शुरुआत वर्ष 1943 में हुई थी 70वें राजकीय औद्यौगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले (गौचर मेला) का शुभारंभ 15 Nov 2022 — गौचर मेला अब तक 11 बार अलग-अलग कारणों से नहीं हो पाया। गौचर मेला वर्ष 1943 के नवंबर ... गौचर मेला — गौचर मेला 1943 में शुरू हुआ और इसका उद्घाटन तत्कालीन उपायुक्त श्री बरनेदी ने किया था। दापा, दीफू, ज्ञानिंग और थोलिंग के तिब्बती क्षेत्रों के व्यापारी ऊन, हिरण क... #gauchar #Dietgaucharchamoli भारत-तिब्बत व्यापार के समय 1943 में शुरू हुआ था गौचर मेला, अब उत्तराखंड ... 15 Nov 2025 — वर्ष 1943 में भोटिया जनजाति एवं अन्य लोगों की पहल पर यह मेला शुरू हुआ, जिसका ..