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भाग १३ | राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज भजन| निवडक भजन | BHAJAN SANGRAH | SHRI MOHAN GAIGOL COLLECTION

Rashtrasant Tukdoji Maharaj Vichar

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भाग १३ | राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज भजन| निवडक भजन | BHAJAN SANGRAH | SHRI MOHAN GAIGOL COLLECTION

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६१. हम प्रीत करें पर तुम न करो, यह कौन देश की रीति है ? हम ध्यान धरें तुम छूप जावो, ऐसीं तुमपर क्या बीति है ? ।। ये मुरलीधर, मनमोहन तुम, फिर क्योंकर सुंदर रूप धरे ? होना था पुतना मोसी-सा, तब दूर भगी होती मति है ।। ऐ बन्सीधर! इस बन्सीमें, इतनी मीठी क्यों तान भरी ? भरना था गर्दभ राग कोई, फिर कोई न सुनता तूंती है ।। ये भक्तहदय इतनों के तुम, निभवाये कैसे जीवन को ? तुकड्या कहे हम नहीं लायक तो फिर तार चढा क्यों रहता है ।। ६२. सुहागन तीरथ करने चली ॥ अंग भरे जेवर सजवाकर, कंधी तेलसे मली ।। पतिके सिरपर बोझा देकर, हाथ हिलावत खुली ।। ऊँट सवारो, घोडा बाँधो, आप रहत है खुली ॥ रोठ बुलाओ, लड़ बनाओ, आप न थोडी हिली ।। पती बिचारा बेल बना है, आप बनी है बली ॥ सन्त-देवता से नहीं नाता, घुमे दुकान और गली।। क्या होगा तीरथ करनेसे ? पती चढ़ाया सुली ॥ तुकड्यादास कहे ए भाई! काहेको ऐसी पली! ।। ६३. जाओ जी जाओ, खबर लेके जाओ। प्रभू को मेरा दिल बतावो॥ मै चाहता हूँ कि तुमसे मिलुगाँ । चरणो मे आके फिरना ढलुंगा । सागर से मिलके नमक क्या रहेगा । वैसा मुझे भी करावो ॥ मेरी हस्ती अब तो जुदी ना रहेगी । मुसिबत पडे चाहे फिर ना सहेंगी । तुकड्या कि जलती है वैराग्य़ ज्योती । सिलगी हुयी ना बुझावो ॥ ६४. दुनिया कि लालचो में, मत खो उमर दिवाने । कुछ पायेंगा ना इसमे, सच को जले सयाने ॥ ईश्वर से लव धरेगा, ईश्वर पुरा करेगा । दुर्जन से प्रेम करके, क्या पायेगा सयाने ॥ जो खुद मरे मरन में, वो क्या लेजावे गुन मे। मरनाही दे करम मे क्या पायेगा निशाने ॥ ऐसे कि आस करना, जो शांती से निभावे । तुकड्या कहे निभाना, जो संत इक जाने ।। ६५. ले चल मुझे पियारे, अपने मकान माही।मुझको लगी है आशा, दुजा आधार नाही॥ चारो तरफ फसा हू, संसार के चिरोने।बांधा पडा हू ऐसा, जिसका सुधार नाही ॥ हैरान हो रहा हू, कही जी नही जगत मे। कर चुक माफ मेरी, मुझमे …॥ डुबी है नाव सारी, तगदीर के नदी मे । दे दो सहारा अपना, तुझबिन तार नाही ॥ हासा पडा है ....किरपा बिना तुम्हारी, तुकडया पुकार नाही ॥