तीन पीढ़ियों तक लक्ष्मीजी रहेंगी घर में स्थिर अगर नित्य सुबह शाम ये लक्ष्मी गणेश स्तोत्र सुनेंगे तो |
Sandip Pandya
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तीन पीढ़ियों तक लक्ष्मीजी रहेंगी घर में स्थिर अगर नित्य सुबह शाम ये लक्ष्मी गणेश स्तोत्र सुनेंगे तो |
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महालक्ष्मी कृत गणपति स्तोत्र (जिसे गणेश लक्ष्मी स्तोत्र भी कहा जाता है) और विष्णुपुराण से प्राप्त महालक्ष्मी स्तोत्र (इंद्र रचित) दोनों ही हिंदू सनातन परंपरा में धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और बाधा-मुक्ति के लिए अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी माने गए हैं।
1. महालक्ष्मी कृत गणपति स्तोत्र (गणेश लक्ष्मी स्तोत्र) का महत्त्वयह स्तोत्र स्वयं माता महालक्ष्मी द्वारा भगवान श्री गणेश की स्तुति में गाया गया है। शास्त्रों में लक्ष्मी और गणेश की संयुक्त पूजा का विधान है, क्योंकि बिना बुद्धि (गणेश) के वैभव (लक्ष्मी) स्थिर नहीं रहता।
विघ्न और दरिद्रता का एक साथ नाश: भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और माता लक्ष्मी धन की देवी हैं। इसके पाठ से जीवन की सभी वित्तीय व व्यक्तिगत बाधाएं दूर होती हैं।
स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति: स्तोत्र के फलश्रुति के अनुसार, जो व्यक्ति इसका नियमित पाठ करता है, महालक्ष्मी उसके घर और शरीर (आरोग्य) को कभी छोड़कर नहीं जातीं
बुद्धि और समृद्धि का मेल: यह स्तोत्र साधक को 'सिद्धि' (सफलता) और 'बुद्धि' (विवेक) दोनों प्रदान करता है, जिससे अर्जित धन का सही उपयोग हो सके
2. विष्णुपुराण से प्राप्त महालक्ष्मी स्तोत्र का महत्त्वयह स्तोत्र विष्णुपुराण के प्रथम अंश (अध्याय 9) से लिया गया है। ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण जब देवराज इंद्र अपना ऐश्वर्य खो बैठे और माता लक्ष्मी समुद्र में विलीन हो गईं, तब समुद्र मंथन के बाद प्रकट होने पर इंद्र ने देवी लक्ष्मी की यह स्तुति की थी।खोया हुआ वैभव वापस पाना: यह स्तोत्र उन लोगों के लिए रामबाण माना जाता है जिनका व्यापार डूब गया हो, नौकरी चली गई हो या जो गंभीर आर्थिक संकट (दरिद्रता) से जूझ रहे हों। इंद्र को भी इसके पाठ से अपना स्वर्ग और ऐश्वर्य पुनः प्राप्त हुआ था।
तीन पीढ़ियों तक लक्ष्मी कृपा: विष्णुपुराण के अनुसार, स्वयं देवी लक्ष्मी ने वरदान दिया है कि जो भी व्यक्ति सुबह-शाम इस स्तोत्र का पाठ करेगा, उसके घर में तीन पीढ़ियों तक लक्ष्मी का वास रहेगा और अलक्ष्मी (दरिद्रता) या गृह-कलह कभी प्रवेश नहीं करेगी।
सद्गुणों की प्राप्ति: इस स्तोत्र में बताया गया है कि लक्ष्मी जी के रूठने पर मनुष्य के शील, सत्य और बुद्धि जैसे गुण भी नष्ट हो जाते हैं। इसके पाठ से न केवल धन, बल्कि मानसिक बल, ओज और समाज में सम्मान भी मिलता है
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