गुरुदेव के ठाकुर, पधारो | 2d story | premanand ji maharaj | animation #premanandjimaharaj
2d animated katha
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गुरुदेव के ठाकुर, पधारो | 2d story | premanand ji maharaj | animation #premanandjimaharaj
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katha by ;- premanand ji maharaj
बहुत ही भोला नवयुवक था — अढ़य्या । लोग उसे “अढ़य्या ” इसलिए कहते थे क्योंकि उसका पहला आहार ढाई किलो का होता था। जब माता-पिता नहीं रहे तो वह आश्रम पहुँच गया और बोला, “मुझे सेवा में रख लीजिए।”
गुरुदेव ने कहा, “गाय चराया करो और जो भोजन बनाओ, पहले ठाकुर जी को भोग लगाना, तभी खाना।”
अैया को कुछ भी नहीं आता था, पर उसका मन साफ़ था। एक दिन उसने ढाई किलो आटे की बाटी और आलू का भुर्ता बनाया, और सरल भाव से कहा, “गुरुदेव के ठाकुर, पधारो।”
क्षणभर में प्रभु श्रीराम प्रकट हो गए। अढ़य्या ने देखा तो दंग रह गया। प्रभु मुस्कुराए और बोले, “जब कोई सच्चे भाव से पुकारता है, तो हम आ ही जाते हैं।”
रामजी ने पूरा भोग पा लिया। अढ़य्या बोला, “आप सब खा गए, अब मैं क्या पाऊं?” प्रभु ने कहा, “आज एकादशी है, इसलिए तेरे गुरु ने तुझे बाहर भेजा था। अब रोज भोग लगाना, हम आएंगे।”
अगले दिन सीताजी भी आईं, फिर लक्ष्मणजी, फिर हनुमानजी, और फिर भरत-शत्रुघ्न भी।
हर दिन अढ़य्या का आटा बढ़ता गया — पाँच किलो, दस किलो, बीस किलो।
गुरुदेव को विश्वास न हुआ। वे देखने गए तो पूरा रामदरबार वहाँ उपस्थित था।
सीताजी स्वयं भोजन बना रही थीं, प्रभु पाते जा रहे थे, और अढ़य्या सेवा में लीन था।
गुरुदेव ने देखा तो उनकी आँखों से आँसू बह निकले।
भगवान बोले, “ज्ञानी मुझे तर्क से नहीं पा सकते, पर जो सहज और भोला है, मैं उसके सामने प्रकट हो जाता हूँ।”
सीताजी ने अपने करकमलों से अैया को प्रसाद खिलाया। उसी क्षण उसका सारा अज्ञान मिट गया और उसे साक्षात सच्चिदानंद प्रभु का दर्शन हुआ।
भोले अढ़य्या की भक्ति सिद्ध हो गई — सच्चे भाव से पुकारो, प्रभु स्वयं आ जाते हैं।
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