Dindeshwari mandir Malhar Bilaspur . डिंडेश्वरी मंदिर मल्हार छत्तीसगढ़
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Dindeshwari mandir Malhar Bilaspur . डिंडेश्वरी मंदिर मल्हार छत्तीसगढ़
नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है हमारे नए vlog में 🙏🙏🙏🙏🙏
आज हम आए हैं बिलासपुर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है मल्हार। अरपा, लीलागर और शिवनाथ नदी के बीच बसा मल्हार कलचुरियों का गढ़ रहा है। यहां मां डिडनेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। डिडनेश्वरी देवी की मूर्ति कलचुरि संवत 900 की है। शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी मां डिडनेश्वरी की प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र है। डिडिनदाई शब्द का अर्थ छत्तीसगढ़ में कुमारी देवी होता है। कुंवारी रूप शैलसुता शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या रत हुई। पद्मासन में विराजित तपोमुद्रा वाली देवी की भव्य गंभीर मुखाकृति है, जिनके नेत्र मूंदे हुए, सौम्य में मुद्रा भाव में लीन, सिंह छाल में विराजित हैं।
हर मन्नत होती है पूरी
मां डिडिनेश्वरी देवी सर्वथा, वरधा, सुखदा सिद्ध देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मूर्ति से एक खास तरह की ध्वनि निकलती है, जिसे लोग माता रानी का चमत्कार बताते । यही वजह है कि लोगों की इस मंदिर को लेकर खास श्रद्धा है, जो भी भक्त सच्चे मन से मन्नत लेकर यहां आता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। माता अपने दरबार से किसी को भी खाली हाथ नहीं जाने देती। यहां स्थानीय लोगों के अलावा पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश और देशभर से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चेत्र और शारदीय नवरात्रि के दिनों में लोग माता डिडनेश्वरी के रंग में रंग जाते है। गांव में भक्ति का माहौल रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना व धार्मिक आयोजन होते हैं। 1985 से हर वर्ष यहां पर मल्हार महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। मंदिर की देखरेख के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लोक न्यास ट्रस्ट मां डिडिनेश्वरी मंदिर स्थापित कर दिया है।
10 वीं सदी में बनी है मंदिर
देवी मंदिर 10 से 11 वीं सदी के मध्य कलचुरि शासकों ने बनवाया था। लेकिन प्राचीन मंदिर ध्वस्त हो चुका है और वर्तमान में जो मंदिर है, उसे 1954 में निषाद समाज ने जीर्णोद्धार करवाया। सन 2000 से मंदिर का नए सिरे से जीर्णोद्धार किया गया। इस साल भी कुछ दिनों पहले ही गर्भगृह में नए सिरे से निर्माण किया गया है। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर के गर्भ गृह में विष्णु के 24 अवतारों में से एक वामन अवतार हैं। आसपास की दीवार में नृत्यरत पार्वती, कुबेर, सरस्वती,नटराज शिव, प्रेमी युगल अप्सराएं एवम् शिव जी की मूर्तियों में कलचुरी काल का वैभव झलकता है।
शिव से मिला मल्हार नाम
भगवान शिव के उपासक कलचुरि नरेश ने यहां मल्लाषरि, मल्लारी शिव का मंदिर बनवाया था। मल्लासुर दैत्य का संहार करने वाले शिव का एक नाम मल्लारी भी कहा गया है जिनके नाम पर नगर मल्हार कहलाया।
देवी का मंदिर कलचुरिकालीन कहा गया है कलचुरि राजवंश की आराध्या भी रही है देवी पार्वती। मान्यता है कि मल्हार को राजा वेणु ने बसाया था। देवी कृपा से राजा वेणु का यश लोकव्यापी हुआ। राजा की यशोगाथा देवलोक तक जा पहुंची और तब राजा वेणु के प्रताप से ही मल्हार में कंचन की बारिश हुई थी।
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