तुम समय से नहीं, ख़ुद से भाग रहे हो! || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर
शास्त्रज्ञान
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तुम समय से नहीं, ख़ुद से भाग रहे हो! || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर
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वीडियो जानकारी: 14.05.2026, वेदांत संहिता
Title: तुम समय से नहीं, ख़ुद से भाग रहे हो! || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी अष्टावक्र गीता के माध्यम से समय, अहंकार और मनुष्य के स्वयं से पलायन को समझा रहे हैं। आचार्य जी बताते हैं कि मनुष्य अतीत की स्मृतियों, वर्तमान के कर्मों और भविष्य की आशाओं में उलझकर स्वयं से बचता रहता है। आचार्य जी समझाते हैं कि मनुष्य वर्तमान से नहीं, बल्कि स्वयं से भागता है, क्योंकि वह अपने वास्तविक स्वरूप का सामना नहीं करना चाहता। आचार्य जी बताते हैं कि भूत, भविष्य और वर्तमान भी अहंकार के छिपने के ठिकाने बन सकते हैं। आचार्य जी समय और बदलाव के संबंध को स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि वर्तमान भी लगातार बदलता रहता है, इसलिए उसे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। अंततः आचार्य जी समझाते हैं कि अध्यात्म का अर्थ केवल वर्तमान में जीना नहीं, बल्कि स्वयं के प्रति ईमानदार होना और अहंकार से मुक्त होना है।
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संगीत: मिलिंद दाते
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