निर्मला (भाग-4) प्रेमचंद
सृजन-विमर्श (बात, साहित्य की...)
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निर्मला (भाग-4) प्रेमचंद
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निर्मला (भाग-4) - मुंशी प्रेमचंद के कथाकार व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. इसमें निर्मला के ससुराल में आने के बाद घरेलु जीवन की जटिलताओं, तनावों की पृष्ठभूमि निर्मित होती दिखाई देती है. तोताराम दामपत्य जीवन के आनंद से वंचित होकर तथा कुंठाग्रस्त होकर अपनी पत्नी और बड़े पुत्र को संदेह से देखने लगते हैं जिसके कारण उनका जीवन त्रासद स्थिति को पहुँचता है.