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दूसरों की बेरुखी और अपमान से मन अशांत क्यों होता है? | Bhagavad Gita 6.7 | Mind Stability

Krishna Jeevan Sutra

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दूसरों की बेरुखी और अपमान से मन अशांत क्यों होता है? | Bhagavad Gita 6.7 | Mind Stability

24 просмотра · 12 дн. назад
Krishna Jeevan Sutra
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क्या किसी की एक बेरुखी, ठंडा मैसेज या अनचाही आलोचना आपका पूरा दिन खराब कर देती है? जानिए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को मान-अपमान और सुख-दुख से ऊपर उठकर अविचल आंतरिक शांति (Inner Stability) पाने का कौन सा गहरा नियम समझाया था। श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 7 (आत्मसंयम योग): जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः। शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः॥ भावार्थ: जिसने अपने मन और इंद्रियों को जीत लिया है और जो भीतर से पूर्णतः शांत हो चुका है, उसके लिए परमात्मा का अनुभव स्वाभाविक हो जाता है। वह सर्दी-गर्मी, सुख-दुख और मान-अपमान में सदैव सम और स्थिर रहता है। इस वीडियो में मुख्य सूत्र: 00:00 - सीने के भीतर तैरती अनकही बेचैनी की असली वजह 01:30 - भगवद्गीता 6.7: जितात्मनः और प्रशान्तस्य का गूढ़ अर्थ 02:45 - दफ्तर और समाज: प्रशंसा में अहंकार और निंदा में बिखराव 03:50 - मैसेज का रिप्लाई न आना: मन कैसे झूठी कहानियां गढ़ता है? 05:03 - 'परमात्मा समाहितः': भीतरी साक्षी भाव और अखंड मौन 🔗 संपूर्ण भगवद्गीता जीवन सूत्र प्लेलिस्ट:    • भगवद्गीता जीवन सूत्र | मन, तनाव और जीवन की...   #BhagavadGita #KrishnaJeevanSutra #InnerPeace #MentalPeace #Overthinking #SelfControl #MindManagement #GitaInHindi #ShriKrishna --- ⚙️ Production Disclosure: This video uses creative digital tools to assist with audio narration and visual conceptualization, bringing timeless Gita teachings into practical modern life while strictly preserving authentic philosophical teachings under human editorial curation.