LINGASHTKAM लिङ्गाष्टकम् (श्री ६ श्री गुरु श्री शिव दत्त स्मारक गड्डी,जोधपुर ) 9414849604@paytm
Rajendra Kumar Vyas Palji
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Rajendra Kumar Vyas Palji
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॥ अथ लिङ्गाष्टकम् ॥
ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं निर्मल भासित शोभित लिङ्गं ।
जन्मज दुःखविनाशक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥१॥
देवमुनिप्रवरार्चित लिङ्गं कामदहं करुणाकर लिङ्गं ।
रावणदर्पविनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामिसदाशिव लिङ्गं ॥२॥
सर्वसुगन्धि सुलेपित लिङ्गं बुद्धिविवर्धन कारण लिङ्गं ।
सिद्ध सुराऽसुरवन्दित लिङ्गं तत्प्रणमामिसदाशिव लिङ्गं ॥३॥
कनक महामणि भूषित लिङ्गं फणिपति वेष्टित शोभित लिङ्गं ।
दक्षसुयज्ञ विनाशक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥४॥
कुंकुम चन्दनलेपित लिङ्गं पङ्कजहार सुशोभित लिङ्गं ।
सञ्चित पापविनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥५॥
देवगणार्चित सेवित लिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गं ।
दिनकरकोटि प्रभाकर लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥६ ॥
अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं सर्वसमुद्भवकारण लिङ्गं ।
अष्टदरिद्र विनाशन लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥७॥
सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं सुरवनपुष्प सदार्चित लिङ्गं ।
परात्परं परमात्मक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥८॥
लिङ्गाष्टकमिदंपुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोतिशिवेनसहमोदते॥९ ॥
॥ इति श्री लिङ्गाष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥