Перейти к содержимому

वो गांव जहां आज भी जाने के लिए CRPF की परमीशन लगती है,1 साल पहले तक Hidma का गांव किसी ने देखा ना था

News Pinch

0:00 / 0:00

वो गांव जहां आज भी जाने के लिए CRPF की परमीशन लगती है,1 साल पहले तक Hidma का गांव किसी ने देखा ना था

89 442 просмотра · 15 часов назад
News Pinch
2,17 млн подписчиков
89 442 просмотра · 15 часов назад
Odoo: https://www.odoo.com/r/5BQ Bastar Documentary:    • ‘खून की नदी’ Bastar| The Last Battle of Na...   What if there is a village in India where even today, entering the area requires permission from the CRPF? Until just a year ago, very few people had ever seen or even visited Hidma’s village, deep inside the forests of Bastar. Surrounded by dense forests and linked to India’s Maoist insurgency, the village remained almost cut off from the outside world. 00:00 – Hidma के गांव की कहानी शुरू 00:34 – Hidma का शव पहली बार इसी जगह रखा गया था 00:43 – 70-75 साल बाद गांव में पहली बार तिरंगा 01:09 – गांव में Maoists का आना-जाना 01:22 – गांव का War Room 01:44 – “हर घर से Hidma” नहीं, खेती चाहिए 01:56 – Tekulgudem: जहां 22 जवान शहीद हुए 02:25 – जवानों के शवों का खौफनाक मंजर 02:40 – Hidma की मौत पर गांव में क्या चर्चा हुई? 02:49 – Sponsored Segment 04:10 – Hidma जिंदा था तो रहस्य, मरने के बाद मुद्दा 04:47 – आखिर Hidma अपने गांव में Hero क्यों था? 05:20 – दिल्ली की नजर में Hidma कितना बड़ा Naxal था? 05:35 – Hidma के गांव तक पहुंचने वाली नई सड़क 06:23 – पत्रकार Mukesh Chandrakar की हत्या का जिक्र 06:30 – Tekulgudem और 22 जवानों की शहादत 07:03 – CRPF Camp यहां क्यों बनाया गया? 07:22 – CRPF Camp और सड़क से कैसे पीछे हटे Maoists? 08:00 – Maoist विचारधारा और गांव के लोगों का रिश्ता 09:01 – कुछ साल पहले तक यहां सड़क भी नहीं थी 09:45 – Maoists और सरकार के बीच संघर्ष को समझने की कोशिश 10:05 – जल-जंगल-जमीन की मांग और विकास का सवाल 11:05 – 22 जवानों पर हुए हमले की कहानी 11:22 – शहीद जवानों के शवों की तलाश 12:17 – जवानों के शव देखकर पत्रकारों का अनुभव 12:49 – CRPF Camp और Gurukul की शुरुआत 13:02 – पहली बार बच्चों तक शिक्षा कैसे पहुंची? 13:26 – Potta Cabin और Residential Schools 14:02 – पूरे देश के लिए Villain, गांव के लिए Hero क्यों? 14:32 – अब शुरू होता है Hidma के गांव का सफर 14:50 – Hidma का घर और परिवार 15:16 – Hidma के भाई के घर पहुंचे 15:33 – Hidma की मां और गृह मंत्री की मुलाकात 16:25 – Hidma कब और कैसे Maoist संगठन में गया? 17:01 – परिवार ने पहली बार Hidma का चेहरा कब देखा? 17:16 – Hidma गांव में क्यों नहीं रहता था? 18:23 – Maoists गांव में कैसे आते थे? 18:48 – गांव वाले खुलकर बात क्यों नहीं कर पाते? 19:20 – CRPF Camp बनने के बाद Maoists का आना बंद 19:43 – गांव में Maoists का War Room 20:07 – Hidma के गांव तक पहुंचना कभी इतना मुश्किल क्यों था? 20:16 – गांव में सड़क कब बनी? 21:06 – Hidma की मौत के बाद सड़क निर्माण 21:33 – गांव में बिजली कब पहुंची? 22:03 – CRPF Camp के बाद बिजली और सुविधाएं 23:30 – गांव के बच्चे आज क्या कर रहे हैं? 24:21 – पहली कक्षा में पढ़ रहे गांव के बच्चे 25:10 – आसपास के सैकड़ों गांवों की पहली पढ़ने वाली पीढ़ी 25:47 – Maoists बच्चों को अपनी विचारधारा कैसे पढ़ाते थे? 26:11 – क्या गांव से कोई फिर हथियार उठाएगा? 27:06 – गांव वालों का जवाब: हथियार नहीं, खेती चाहिए 27:31 – बच्चे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? 27:59 – गांव वालों ने देखा है खून-खराबा 28:15 – Maoist दौर में गांव से बाहर जाना भी मुश्किल था 28:50 – “हर घर से Hidma” के नारे पर गांव का जवाब 29:11 – आदिवासी ही Naxal क्यों बनता है और आदिवासी ही DRG में क्यों जाता है? 29:42 – एक ही परिवार में Naxal और DRG जवान 29:54 – आखिर इस लड़ाई के पीछे की असली वजह क्या है? 30:12 – Hidma के घर के सामने Anganwadi 30:50 – जिस घर में Hidma का शव रखा गया था 31:06 – दीवार पर तिरंगा और बच्चों की पढ़ाई: बदलाव की कहानी 31:21 – कुछ साल पहले तक यहां पहुंचना लगभग असंभव था 31:39 – गांव में पहली बार तिरंगा क्यों फहराया गया? 32:02 – Naxal “Janatana Sarkar” बनाम भारत सरकार 32:35 – Maoist विचारधारा इस इलाके में कैसे पहुंची? 33:35 – पढ़े-लिखे लोग Maoist विचारधारा तक कैसे पहुंचे? 33:58 – क्या Hidma की वजह से गांव में सड़क बनी? 34:31 – हथियार से हथियार और विचार से विचार की लड़ाई 35:00 – Hidma के गांव में CRPF Camp और Helipad 35:17 – Hidma किन परिस्थितियों में Naxal बना? 35:42 – Maoists बच्चों को कैसे अपने साथ ले जाते थे? 36:03 – गांव में Maoist और आम नागरिक की पहचान मुश्किल क्यों थी? 37:14 – सड़क और बिजली से गांव कैसे बदल रहा है? 37:25 – क्या विकास से Naxalism को हराया जा सकता है? 38:08 – गांव को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश 39:16 – क्या Hidma ने सुरक्षा बलों को चुनौती दी थी? 39:31 – Hidma का War Room कहां था? 39:52 – Hidma के लिए यह गांव किसी “राजधानी” जैसा क्यों था? 41:15 – Tekulgudem Attack में Battalion No. 1 की भूमिका 41:47 – Batse Deva के Surrender की खबर कितनी सच? 43:24 – कुछ साल पहले यहां सड़क तक नहीं थी 43:47 – गांव में जाने का डर और पहली बार तिरंगा 44:09 – गांव के लोगों के चेहरों पर खामोशी और डर 44:32 – विकास गांव तक कैसे पहुंच रहा है? 45:02 – गांव में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी 45:49 – पानी और गांव की नई सुविधाएं 50:00 – गांव वालों की जिंदगी में आए बदलाव 55:00 – Hidma और गांव वालों की नजर में उसकी छवि 1:05:17 – क्या Maoists ने गांव के युवाओं को अपने साथ आने को कहा? 1:05:47 – Battalion No. 1 के Commander Batse Deva का गांव से रिश्ता 1:09:34 – Hidma के गांव में सड़क, बिजली और विकास 1:10:00 – गांव वालों के लिए Hidma आज भी Hero क्यों है #AbhinavPandey #SaurabhTripathi #NewsPinch #News #India #Politics #Hidma #Bastar #Naxal #Naxalism #Maoist #CRPF #Chhattisgarh #Dantewada #Sukma #BastarDocumentary