मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - । ६७ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी
Shree Chaitanya Ram
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घन:श्याम हा राम लावण्यरूपी |
महाधीर गंभीर पूर्णप्रतापी |
करी संकटी सेवकाचा कुडावा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा | |६७| |