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बल्देवगढ का विशाल दुर्ग रहस्यों से भरा और भूल भुलैया बाला रास्ता #baldevgarhkakila #Sanjayvlogs77

Sanjay Suryavanshi

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बल्देवगढ का विशाल दुर्ग रहस्यों से भरा और भूल भुलैया बाला रास्ता #baldevgarhkakila #Sanjayvlogs77

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Sanjay Suryavanshi
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बल्देवगढ का विशाल दुर्ग रहस्यों से भरा और भूल भुलैया बाला रास्ता #baldevgarhkakila #Sanjayvlogs77 बल्देवगढ़ की तोप युद्ध के समय जब चलती थी तो कोसों दूर के लोग सहम जाते थे 4 वर्ष पहले टीकमगढ़ से 26 किलोमीटर दूर स्थित है बल्देवगढ़ का किला। किले को महाराजा विक्रमादित्य सिंह बुंदेला ने 1776-1817 में मराठों के आतंक से भयभीत होकर 18 वीं शताब्दी में बनाया था। उन्होंने 1783 ईस्वी में अपनी राजधानी ओरछा से टीकमगढ़ स्थानांतरित कर सैन्य स्थिति को मजबूत करने के लिए सैन्य अड्डा एवं युद्ध सामग्री भंडारण की व्यवस्था के लिए इस किले को तैयार करवाया था। इस किले में एक निश्चित अंतराल में बुर्जों पर तोपें रखी जाती थीं। जिसमें भवानी शंकर व गर्भ गिरावन तोप काफी प्रसिद्ध थी, जो आज भी नगर की शान है। किले के तीन तरफ तालाब और दक्षिण दिशा की ओर पहाड़ी है। जिससे यह किला पूरी तरह सुरक्षित है। बुजुर्गों के अनुसार किले की साफ-सफाई में मिट्टी के बर्तन, पत्थर के गोले जिनका आकार 2.5 से 10 किलो ग्राम तक के मिले हैं। यहां पर एक बड़ी तोप जिसे गर्भगिरावनी तोप के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि जब यह तोप युद्ध के समय चलती थी, तब इसके वेग से गर्भवती माताओं के गर्भ गिर जाते थे। कुछ अन्य छोटीं तोपें, इनके ऐतिहासिक महत्व एवं सुरक्षा को देखते हुये भोपाल के म्यूजियम में पहुंचा दीं गईं हैं। इसी तोप के नाम पर यहां कहावत बनी “बल्देवगढ़ की तोप अर्थात बहुत बड़ी हस्ती। तोप नगर के किला परिसर में संरक्षण के अभाव में खुले मैदान में पड़ी है। भवानी शंकर तोप को करीब 5 वर्ष पूर्व तत्कालीन तहसीलदार अनिल तलैया द्वारा बुर्ज में रखे होने के कारण उसको सार्वजनिक स्थल पर रखने के लिए जेसीबी की मदद से निकलवाया गया था। तोप को संरक्षित करने कुछ फीट की दूरी पर एक चबूतरे निर्माण किए जाने की बात कही गई थी। महीनों बीतने के बाद प्लेटफार्म तो बन गया, लेकिन आज भी यह तोप पुरातत्व अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही की बदौलत संरक्षण के अभाव में खुले में पड़ी हुई है। किले के गार्ड गनेश रजक ने बताया कि यह तोप सिर्फ एक बार सैकड़ो वर्षों पूर्व चली थी।गौरतलब है कि बल्देवगढ़ नगर को पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटन नगर घोषित किया हुआ है और नगर में किला व चंदेल कालीन तालाब सहित अनेक पर्यटन स्थल स्थित हैं। यहां पर पूरे देश से दूरदराज के क्षेत्रों से सैलानी भ्रमण करने आते हैं। बल्देवगढ़। गर्भ गिरावन तोप अपना अस्तित्व तलाशती हुई। संजय जैन। बल्देवगढ़ टीकमगढ़ से 26 किलोमीटर दूर स्थित है बल्देवगढ़ का किला। किले को महाराजा विक्रमादित्य सिंह बुंदेला ने 1776-1817 में मराठों के आतंक से भयभीत होकर 18 वीं शताब्दी में बनाया था। उन्होंने 1783 ईस्वी में अपनी राजधानी ओरछा से टीकमगढ़ स्थानांतरित कर सैन्य स्थिति को मजबूत करने के लिए सैन्य अड्डा एवं युद्ध सामग्री भंडारण की व्यवस्था के लिए इस किले को तैयार करवाया था। इस किले में एक निश्चित अंतराल में बुर्जों पर तोपें रखी जाती थीं। जिसमें भवानी शंकर व गर्भ गिरावन तोप काफी प्रसिद्ध थी, जो आज भी नगर की शान है। किले के तीन तरफ तालाब और दक्षिण दिशा की ओर पहाड़ी है। जिससे यह किला पूरी तरह सुरक्षित है। बुजुर्गों के अनुसार किले की साफ-सफाई में मिट्टी के बर्तन, पत्थर के गोले जिनका आकार 2.5 से 10 किलो ग्राम तक के मिले हैं। यहां पर एक बड़ी तोप जिसे गर्भगिरावनी तोप के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि जब यह तोप युद्ध के समय चलती थी, तब इसके वेग से गर्भवती माताओं के गर्भ गिर जाते थे। कुछ अन्य छोटीं तोपें, इनके ऐतिहासिक महत्व एवं सुरक्षा को देखते हुये भोपाल के म्यूजियम में पहुंचा दीं गईं हैं। इसी तोप के नाम पर यहां कहावत बनी “बल्देवगढ़ की तोप अर्थात बहुत बड़ी हस्ती। तोप नगर के किला परिसर में संरक्षण के अभाव में खुले मैदान में पड़ी है। भवानी शंकर तोप को करीब 5 वर्ष पूर्व तत्कालीन तहसीलदार अनिल तलैया द्वारा बुर्ज में रखे होने के कारण उसको सार्वजनिक स्थल पर रखने के लिए जेसीबी की मदद से निकलवाया गया था। तोप को संरक्षित करने कुछ फीट की दूरी पर एक चबूतरे निर्माण किए जाने की बात कही गई थी। महीनों बीतने के बाद प्लेटफार्म तो बन गया, लेकिन आज भी यह तोप पुरातत्व अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही की बदौलत संरक्षण के अभाव में खुले में पड़ी हुई है। किले के गार्ड गनेश रजक ने बताया कि यह तोप सिर्फ एक बार सैकड़ो वर्षों पूर्व चली थी।गौरतलब है कि बल्देवगढ़ नगर को पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटन नगर घोषित किया हुआ है और नगर में किला व चंदेल कालीन तालाब सहित अनेक पर्यटन स्थल स्थित हैं। यहां पर पूरे देश से दूरदराज के क्षेत्रों से सैलानी भ्रमण करने आते हैं। #sanjayvlogs #baldevgarhkakila #kisnebanabayathabaldevgarhkakila #baldevgarhkakila #rajaveersinghjudevkakila #tikamgarhkakila #baldevgarhkakila #sanjayvlogs77