Is the desire for wealth right or wrong? #money #osho
Philosophy & life lessons
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Is the desire for wealth right or wrong? #money #osho
29 просмотров · 22 часа назад
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🌹🌹ओशो के अनुसार धन और पद अपने आप में बुरे नहीं हैं, बल्कि उनके प्रति हमारी "चाह" (आकांक्षा या मानसिक पकड़) समस्या है। ओशो पारंपरिक संतों की तरह धन या त्याग के विरोधी नहीं थे। उनका मानना था कि धन और पद जीवन को सुगम बनाने के सुंदर माध्यम हैं, लेकिन जब ये इंसान के मन पर हावी हो जाते हैं, तो आत्मिक पतन का कारण बनते हैं।
🌟🌟धन और पद की चाह (आकांक्षा) को लेकर ओशो के मुख्य विचार इस प्रकार हैं:
🌟1. धन और पद केवल साधन हैं, साध्य नहीं
ओशो कहते हैं कि धन जीवन की व्यावहारिक आवश्यकताओं (भोजन, घर, स्वास्थ्य) को पूरा करने का एक आवश्यक साधन है। लेकिन भूल तब होती है जब इंसान साधन को ही अपनी मंजिल (साध्य) मान लेता है और उसकी "पूजा" करने लगता है।
• ध्यान हो तो धन सुंदर है: यदि आपके भीतर जागरूकता (ध्यान) है, तो धन सृजनात्मक और कल्याणकारी बन जाता है।
• अवेयरनेस न हो तो गुलामी: बिना चेतना के, व्यक्ति धन और पद का मालिक नहीं बनता, बल्कि उनका गुलाम बन जाता है।
🌟2. चाहत के पीछे छिपा असली कारण: भय और असुरक्षा
इंसान मरते दम तक धन और पद के पीछे क्यों भागता है? ओशो के अनुसार, इसके पीछे हमारी गहरी मानसिक असुरक्षा और भय छिपा होता है।
• व्यक्ति सोचता है कि बहुत सारा धन या कोई बड़ा पद उसे जीवन में हमेशा के लिए सुरक्षित कर देगा।
• लेकिन सच यह है कि बाहर का धन आपके भीतर के खालीपन या मौत के डर को नहीं मिटा सकता। पद पर बैठा व्यक्ति भी वैसे ही मरता है जैसे एक आम इंसान। जब आप इस बात को गहराई से समझ लेते हैं, तो धन-पद की अंधी दौड़ अपने आप शांत हो जाती है।
🌟3. बाहरी अमीरी बनाम आंतरिक अमीरी (Inner Richness)
ओशो "अमीर" शब्द को एक नया आयाम देते हैं। उनके अनुसार, दुनिया में दो तरह के गरीब होते हैं—एक 'गरीब गरीब' और दूसरे 'अमीर गरीब'।
• जिसके पास केवल बैंक बैलेंस है, वह भीतर से दरिद्र हो सकता है क्योंकि बाहरी संपदा आंतरिक रूपांतरण नहीं कर सकती।
• असली अमीर वह है जिसके पास संवेदनशीलता, संगीत, कला, प्रेम और ध्यान की आंतरिक दौलत है। ओशो कहते हैं कि जब समाज बाहरी तौर पर समृद्ध हो जाता है, तभी उसे यह अहसास होता है कि असली खोज तो भीतर के खजाने की है।
🌟4. जीवन के उत्सव को भूल जाना
हम धन और पद की चाह में इतने अंधे क्यों हैं? क्योंकि हम जीवन को जीना और उत्सव मनाना भूल गए हैं।
• आप पैसों से वासना (सेक्स) खरीद सकते हैं, लेकिन प्रेम नहीं। आप पिकासो की पेंटिंग खरीद सकते हैं, लेकिन डूबते हुए सूरज या तारों भरी रात का असली आनंद मुफ़्त है।
• ओशो का कहना है कि धन और पद की चाह को जबरदस्ती छोड़ने (त्याग करने) की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, जीवन का आनंद लेना और उत्सव मनाना शुरू करें; जैसे ही आपके जीवन में आंतरिक रस आएगा, धन की मानसिक पकड़ अपने आप ढीली हो जाएगी।
Disclaimer :
The voice used in this video is AI-generated and inspired by the style of Osho’s voice. It is not Osho’s original recording. All the words spoken here are fully our own writing and creative interpretation, made as a respectful tribute to Osho’s teachings and philosophy, purpose for education.
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