जय शंकर 🔱 शिव स्तुति | Har Har Mahadev | Powerful Shiva Bhajan | MOODIBEATS
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🔱 *जय शंकर | शिव स्तुति* 🔱
🙏 हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय! 🙏
प्रस्तुत है MOODIBEATS की एक भक्तिमय प्रस्तुति — **“जय शंकर — शिव स्तुति”**, भगवान शिव के चरणों में समर्पित एक भावपूर्ण स्तुति।
डमरू की गूँज, शंखनाद, नगाड़ों की दिव्य ध्वनि और भक्तिमय संगीत के साथ महादेव की महिमा का अनुभव करें। भोलेनाथ की कृपा और भक्ति से मन को शिवमय बनाइए।
🕉️ *गीत स्रोत एवं साहित्यिक श्रद्धांजलि*
इस शिव स्तुति के बोल स्वर्गीय श्री अनंत गोपाल दत्त जी की पुस्तक *“शून्य से अनंत तक”* से लिए गए हैं। हम उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
🎼 *संगीत एवं संगीत संयोजन:* असीम “अनंत”
Vocal: Asim and AI
🎵 *प्रस्तुति:* MOODIBEATS
🔱 *भक्ति:* भगवान शिव को समर्पित
🙏 इस शिव स्तुति को सुनें, परिवार और मित्रों के साथ साझा करें और कमेंट में लिखें — *हर हर महादेव!*
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हर हर महादेव! 🔱
ॐ नमः शिवाय! 🕉️
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कवि परिचय
कवि स्वर्गीय श्री अनंत गोपाल दत्त का जन्म बिहार राज्य के पूर्णिया जिला अन्तर्गत झलारी ग्रााम में पूज्य श्री गिरीश चंद्र दत्त एवं श्रीमति पार्वती दत्त के घर 13 जनवरी सन् 1941 (पौष पूर्णिमा) को हुआ था। पिता स्वर्गीय श्री गिरीश चंद्र दत्त एक संपन्न, विद्वान, धार्मिक, कोमल हृदय, समाज सेवी,जमींदार थे। उन्होनें अपने जीवन पर्यन्त संत सेवा, गरीबों एवं पिछड़ो के कल्याण के लिए कार्य किया। आपकी माता स्वर्गीय श्रीमति पार्वती दत्त एक कर्त्तव्यनिष्ठ, अनुशासनप्रिय, व्यवहारिक ज्ञाान एंव समभाव रखने वाली सशक्त धार्मिक महिला थीं, जिनका मूल मंत्र था- "किंचित करो पर वंचित मत करो"। आपके व्यक्तित्व पर माता व पिता के कार्यों और विचारधारा का गहरा प्रभाव रहा है। 5 वर्ष की अवस्था में आपके सिर से पिता का साया उठ गया, संयुक्त परिवार में माता एवं बड़े भ्राता के संरक्षण में पालन-पोषण एवं शिक्षा-दीक्षा हुई। बाल्यकाल से ही आप मेधावी छात्र रहे। आपने प्राारंभिक शिक्षा झलारी ग्रााम के स्कूल में ही प्रााप्त किया तदुपरांत आगे की शिक्षा पूर्णिया एवं बिहार की राजधानी पटना से भूगोल विषय से उपस्नातक (एम.ए.) की डिग्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। तत्पश्चात बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा श्रमाधिक्षक के पद पर नियुक्त हुए और बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में अपनी अमूल्य सेवा प्रदान करते हुए उप-श्रमायुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद आपने अपना पसंदीदा पैतृक कार्य कृषि को अपनाया।
आप एक ईमानदार, कर्मठ, आदर्श सिद्धांत वाले अधिकारी रहें। आपने बालश्रमिकों एंव अशिक्षित श्रमिको के लिए विशेष अभूतपूर्व कार्य किये, जिनके लिए आप बिहार सरकार द्वारा सम्मानित हुए। सदैव कार्यक्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ रहें तथा अपने सिद्धांत और विचार पर अंत तक अडिग रहे, जिस कारण आपको अपने कार्य काल के दौरान बहुत सी समस्याओं एवं विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ाा। पूर्वी बिहार के अति सम्पन्न परिवार से होते हुए भी आप आडम्बर पूर्ण जीवन से दूर रहें, आपका जीवन सादा और सरल रहा।
बाल्यकाल से ही कला एवं साहित्य के प्रति आपकी गहरी रूचि थी। ग्राामीण परिवेश मे पले-बड़े होने के कारण ग्रामीण परिवेश के प्रति आकर्षण, प्रकृत्ति प्रेम, देश प्रेम, योग एवं अध्यात्म आपके जीवन का अभिन्न अंग रहा, जो आपकी कविताओं में स्पष्ट रूप से झलकता है।आप कई भाषाओ के जानकार रहें जिसमें हिंदी, इंग्लिश, बंगला, उर्दू, संथाली, कैथी,अंगिका और संस्कृत प्रमुख थी।इन भाषाओं की अच्छी जानकारी रखने के बावजूद आपने राष्ट्र भाषा हिन्दी को अपने साहित्य के लिए चुना। इंग्लिश व हिन्दी की कविताओं का प्रकाशन भी समय समय-समय पर होता रहा। 'धर्मयुग', 'हिन्दुस्तान टाइम्स प्रेस', 'युवक', 'कहानी', 'परंपरा', 'निहारिका', 'समालोचक', 'विनोद', 'रानी' इत्यादि प्रमुख पत्रिकाऐं रही। अपने शब्दो से प्रकृति का चित्रण और प्रकृति के द्वारा ही भावनाओं का वर्णन आपका प्रिय विषय रहा है। साथ ही देशकाल की घटनाओं को भी आपने बहुत संवेदनशील तरीको से अपने शब्दो में बाँधा है। उत्तरार्द्ध की कविताओं में आपकी आत्मचिंतन व अध्यात्मिक यात्राा की झलक स्पष्ट दिखती है।
आपका सारा जीवन एक योगी की तरह रहा। योग को अपने जीवन में उतारने के साथ-साथ आप अपने कार्य क्षेत्र में भी कर्मयोगी रहे। स्वभाव से संत और कर्म से योगी यही आपका संक्षिप्त जीवन परिचय है।
अध्यात्मिक चिंतन का तेज, निर्विकार, शिवस्वरूप के तेज से मंडित, जीवन के अंतिम पड़ााव में आप निरंतर मौन जप-साधना में ध्यानस्थ रहें।
आपका पूरा जीवन श्रीमद्भाागवत गीता के कर्मयोग का जीवंत उदाहरण रहा या कहा जाय श्रीमद्भागवत गीता के कर्मयोग के मानव स्वरूप थें तो कहीं से भी अतिशयोक्ति नहीं होंगी। 17 सितंबर 2025 ( आश्विन मास, पितृपक्ष, पुष्य नक्षत्र एकादशी तिथी ) को आप इस धरा पर अपनी इहलीला संपन्न कर माँ भगवती के चरणों में समाधिस्थ हुऐं।
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MOODIBEATS is a reflection of that journey different moods, different emotions, different stories, brought together through music.
🎵 Every mood has a melody. Every melody has a story. Every beat is a chapter.